Naad ko drasta bhav se sune ya sadharan tarike se

 नाद को द्रष्टा भाव से सुनना ही बेहतर माना जाता है। इसका अर्थ है कि आप नाद को सुनने की कोशिश या उसमें हस्तक्षेप न करें, बल्कि शांत होकर केवल साक्षी बनकर उसे सुनें। ध्यान को नाद पर टिकाएँ, लेकिन यह अपेक्षा न रखें कि कोई विशेष ध्वनि अवश्य सुनाई दे। नाद तेज हो, धीमा हो, बदलता रहे या कुछ समय के लिए बंद हो जाए—हर स्थिति में केवल साक्षी बने रहें। उसे पकड़ने, बढ़ाने या उसका अर्थ निकालने की कोशिश न करें। धीरे-धीरे मन की चंचलता कम होने पर सूक्ष्म ध्वनि अधिक स्पष्ट अनुभव हो सकती है। यही द्रष्टा भाव की साधना है।

मेरी चंद्र नाडी बहुत ज्यादा सक्रिय है और हमेशा सिर के लेफ्ट साइड में असहनीय दर्द रहता हैं और पूरी लेफ्ट साइड में हमेशा ,झटके महसूस होते , बहुत ज्यादा परेशानी होती है

 मेरी चंद्र नाडी बहुत ज्यादा सक्रिय है और हमेशा सिर के लेफ्ट साइड में असहनीय दर्द रहता हैं और पूरी लेफ्ट साइड में हमेशा ,झटके महसूस होते , बहुत ज्यादा परेशानी होती है?


चंद्र नाड़ी (इड़ा) की अत्यधिक सक्रियता संतुलन बिगाड़ सकती है, जिससे सिर के बाएँ हिस्से में दर्द, झटके और असहजता महसूस हो सकती है। इसे संतुलित करने के लिए सूर्य नाड़ी (पिंगला) को सक्रिय करना जरूरी है।

  • दाएँ नथुने से श्वास लें और बाएँ से छोड़ें (सूर्य भेदी प्राणायाम)।

  • भस्त्रिका और अनुलोम-विलोम करें, दाएँ नथुने पर अधिक ध्यान दें।

  • सूर्य साधना करें, सुबह सूरज की रोशनी में बैठें।

  • गुरु से मार्गदर्शन लें यदि समस्या बढ़ रही है।

नाड़ी संतुलन से यह समस्या धीरे-धीरे ठीक हो जाएगी।

Comments

Popular posts from this blog

guru jee kuch dino pahle tk third eye me Blue colour ki screen dikhai deti thi pr ab kabhi kabhi green.........

परमात्मा क्यों भेजता है आत्मा को संसार में?

मैं जब दीये को एक मिनट व देखु फिर आँखे बंद करू तो दिए की ज्योति मुझें आज्ञा चक्र पर दिखाई देती है.....