guru jee kuch dino pahle tk third eye me Blue colour ki screen dikhai deti thi pr ab kabhi kabhi green.........

Guru jee kuch dino pahle tk third eye me Blue colour ki screen dikhai deti thi pr ab kabhi kabhi green colour second time ke liye aata hai fir kuch nhi dikh rha पहले तीसरी आंख में नीले रंग की स्क्रीन दिखना शांति, गहराई और आध्यात्मिक सुरक्षा का संकेत था। अब बीच-बीच में हरे रंग का आना दर्शाता है कि आपकी साधना की ऊर्जा हीलिंग, संतुलन और हृदय चक्र से जुड़ाव की ओर बढ़ रही है। यह रंग परिवर्तन सामान्य है और साधना के विभिन्न चरणों में होता है। कुछ समय तक रंग न दिखना भी संकेत है कि चेतना आंतरिक स्थिरता ले रही है और मन को विश्राम चाहिए। इसे रुकावट न समझें, बल्कि अभ्यास जारी रखें। धैर्य और नामजप से आगे और गहरे अनुभव होंगे।

आपने जो रहस्य कहा अद्भुत है पर कुछ भगतों को नींद ध्यान में साधु संत या कुछ दिव्य शक्तियों द्वारा मार्गदर्शन किया जाता यह कोनसी स्थिति में आता है जी, पर वह कहता है कि वह अपनी पत्नी से शरीरक सम्बन्ध भी बनते रहते हैं । कृपया मार्गदर्शन जरुर करें

 आपने जो रहस्य कहा अद्भुत है पर कुछ भगतों को नींद ध्यान में साधु संत या कुछ दिव्य शक्तियों द्वारा मार्गदर्शन किया जाता यह कोनसी स्थिति में आता है जी, पर वह कहता है कि वह अपनी पत्नी से शरीरक सम्बन्ध भी बनते रहते हैं । कृपया मार्गदर्शन जरुर करें ?


स्वप्न या ध्यान में साधु-संतों या दिव्य शक्तियों द्वारा मार्गदर्शन मिलना एक उच्च आध्यात्मिक स्थिति का संकेत हो सकता है। यह तब होता है जब साधक की चेतना विकसित होती है और सूक्ष्म लोक से संपर्क स्थापित होता है।

लेकिन यदि कोई व्यक्ति ब्रह्मचर्य का पालन किए बिना, दांपत्य जीवन में रहते हुए भी दिव्य मार्गदर्शन प्राप्त कर रहा है, तो यह उसकी साधना, पूर्व जन्म के संस्कार और वर्तमान तपस्या पर निर्भर करता है।

मार्गदर्शन:

  • संयम जरूरी नहीं, लेकिन ऊर्जा संतुलन महत्वपूर्ण है।

  • नियत क्रिया (संयमित जीवन) का पालन करें।

  • सच्ची भक्ति और निष्ठा रखें।

  • यदि दिव्य शक्तियाँ मार्गदर्शन कर रही हैं, तो उनका उद्देश्य समझें और उनका सही उपयोग करें।

गुरु से मार्गदर्शन अवश्य लें, ताकि साधना सही दिशा में जाए।

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