Naad ko drasta bhav se sune ya sadharan tarike se

 नाद को द्रष्टा भाव से सुनना ही बेहतर माना जाता है। इसका अर्थ है कि आप नाद को सुनने की कोशिश या उसमें हस्तक्षेप न करें, बल्कि शांत होकर केवल साक्षी बनकर उसे सुनें। ध्यान को नाद पर टिकाएँ, लेकिन यह अपेक्षा न रखें कि कोई विशेष ध्वनि अवश्य सुनाई दे। नाद तेज हो, धीमा हो, बदलता रहे या कुछ समय के लिए बंद हो जाए—हर स्थिति में केवल साक्षी बने रहें। उसे पकड़ने, बढ़ाने या उसका अर्थ निकालने की कोशिश न करें। धीरे-धीरे मन की चंचलता कम होने पर सूक्ष्म ध्वनि अधिक स्पष्ट अनुभव हो सकती है। यही द्रष्टा भाव की साधना है।

dhyan ki kis stage pe hai kaise pata lagega

 dhyan ki kis stage pe hai kaise pata lagega ?


ध्यान की किस स्टेज पर हैं, इसे जानने के कुछ संकेत:

  1. प्रारंभिक अवस्था – मन चंचल रहता है, विचार आते-जाते हैं, और स्थिरता पाने में कठिनाई होती है।
  2. मध्य अवस्था – मन शांत होने लगता है, विचार कम हो जाते हैं, और एकाग्रता बढ़ने लगती है। शरीर में हलचल, कंपन, और रंग दिखने लगते हैं।
  3. उन्नत अवस्था – मन पूरी तरह शांत हो जाता है, आंतरिक ध्वनि (अनाहत नाद), दिव्य प्रकाश, या गहरी शांति का अनुभव होता है।
  4. समाधि अवस्था – आत्मा और परमात्मा का मिलन महसूस होता है, अहंकार समाप्त हो जाता है, केवल शुद्ध आनंद और शांति का अनुभव होता है।

👉 अपनी स्थिति समझने के लिए ध्यान के बाद आत्मनिरीक्षण करें। 🙏

Comments

Popular posts from this blog

guru jee kuch dino pahle tk third eye me Blue colour ki screen dikhai deti thi pr ab kabhi kabhi green.........

परमात्मा क्यों भेजता है आत्मा को संसार में?

मैं जब दीये को एक मिनट व देखु फिर आँखे बंद करू तो दिए की ज्योति मुझें आज्ञा चक्र पर दिखाई देती है.....