Naad ko drasta bhav se sune ya sadharan tarike se

 नाद को द्रष्टा भाव से सुनना ही बेहतर माना जाता है। इसका अर्थ है कि आप नाद को सुनने की कोशिश या उसमें हस्तक्षेप न करें, बल्कि शांत होकर केवल साक्षी बनकर उसे सुनें। ध्यान को नाद पर टिकाएँ, लेकिन यह अपेक्षा न रखें कि कोई विशेष ध्वनि अवश्य सुनाई दे। नाद तेज हो, धीमा हो, बदलता रहे या कुछ समय के लिए बंद हो जाए—हर स्थिति में केवल साक्षी बने रहें। उसे पकड़ने, बढ़ाने या उसका अर्थ निकालने की कोशिश न करें। धीरे-धीरे मन की चंचलता कम होने पर सूक्ष्म ध्वनि अधिक स्पष्ट अनुभव हो सकती है। यही द्रष्टा भाव की साधना है।

Guru ji mujhe kahe bhi dekhta hu to mujhe Kai parkar ki akriti dikhi deti h es ke bare me bataye ?

 Guru ji mujhe kahe bhi dekhta hu to mujhe Kai parkar ki akriti dikhi deti h es ke bare me bataye ?


गुरु जी, यदि आपको कहीं भी देखने पर विभिन्न प्रकार की आकृतियाँ (Shapes) दिखाई देती हैं, तो यह आज्ञा चक्र (Third Eye) के जागरण का संकेत हो सकता है। जब आज्ञा चक्र सक्रिय होता है, तो मानसिक स्तर पर सूक्ष्म दृष्टि (Clairvoyance) विकसित होने लगती है। ये आकृतियाँ आपके अवचेतन मन (Subconscious Mind) के प्रतीक भी हो सकती हैं, जो किसी संदेश या ऊर्जा को प्रकट कर रही होती हैं। ध्यान के दौरान मन को शांत रखें और आकृतियों पर अधिक ध्यान न दें। समय के साथ ये स्पष्ट संदेश या प्रतीक बन सकते हैं, जो आपकी साधना को दिशा देंगे।

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