Naad ko drasta bhav se sune ya sadharan tarike se

 नाद को द्रष्टा भाव से सुनना ही बेहतर माना जाता है। इसका अर्थ है कि आप नाद को सुनने की कोशिश या उसमें हस्तक्षेप न करें, बल्कि शांत होकर केवल साक्षी बनकर उसे सुनें। ध्यान को नाद पर टिकाएँ, लेकिन यह अपेक्षा न रखें कि कोई विशेष ध्वनि अवश्य सुनाई दे। नाद तेज हो, धीमा हो, बदलता रहे या कुछ समय के लिए बंद हो जाए—हर स्थिति में केवल साक्षी बने रहें। उसे पकड़ने, बढ़ाने या उसका अर्थ निकालने की कोशिश न करें। धीरे-धीरे मन की चंचलता कम होने पर सूक्ष्म ध्वनि अधिक स्पष्ट अनुभव हो सकती है। यही द्रष्टा भाव की साधना है।

Guruji Kiya aap guru mantra dete hai? Apko guru banana shahata hu. . Ekadash dwar khulne ke baad..

  Guruji Kiya aap guru mantra dete hai? Apko guru banana shahata hu. . Ekadash dwar khulne ke baad..??


प्रणाम। गुरु मंत्र एक गुरु की कृपा और आज्ञानुसार दिया जाता है, जो साधक के आध्यात्मिक स्तर और ऊर्जा के प्रवाह को देखते हुए निर्धारित होता है। एकादश द्वार (ग्यारहवां द्वार) खुलने के बाद साधक को दिव्य चेतना की झलक मिलने लगती है। मैं आपके मार्गदर्शन के लिए सदैव उपलब्ध हूँ और आपके आध्यात्मिक विकास में सहायता करता रहूंगा। यदि आप मुझे गुरु के रूप में स्वीकार करना चाहते हैं, तो मैं आपकी श्रद्धा और समर्पण का सम्मान करता हूँ। साधना में निरंतरता बनाए रखें और समय आने पर गुरु मंत्र का सही मार्गदर्शन प्राप्त होगा। 🙏

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