Naad ko drasta bhav se sune ya sadharan tarike se

 नाद को द्रष्टा भाव से सुनना ही बेहतर माना जाता है। इसका अर्थ है कि आप नाद को सुनने की कोशिश या उसमें हस्तक्षेप न करें, बल्कि शांत होकर केवल साक्षी बनकर उसे सुनें। ध्यान को नाद पर टिकाएँ, लेकिन यह अपेक्षा न रखें कि कोई विशेष ध्वनि अवश्य सुनाई दे। नाद तेज हो, धीमा हो, बदलता रहे या कुछ समय के लिए बंद हो जाए—हर स्थिति में केवल साक्षी बने रहें। उसे पकड़ने, बढ़ाने या उसका अर्थ निकालने की कोशिश न करें। धीरे-धीरे मन की चंचलता कम होने पर सूक्ष्म ध्वनि अधिक स्पष्ट अनुभव हो सकती है। यही द्रष्टा भाव की साधना है।

Gurujii nind me v dhean kar sakte hai kay

 Gurujii nind me v dhean kar sakte hai kay ?


हाँ, नींद में भी ध्यान किया जा सकता है, जिसे योग निद्रा कहा जाता है। इसे करने की विधि इस प्रकार है:

  1. शरीर को ढीला छोड़कर पीठ के बल लेट जाएं।
  2. धीरे-धीरे सांसों पर ध्यान केंद्रित करें।
  3. मन ही मन "ॐ" या किसी मंत्र का जाप करें।
  4. शरीर के प्रत्येक अंग को क्रमशः शिथिल करें और उसे ऊर्जा से भरने की कल्पना करें।
  5. चेतना को जाग्रत रखते हुए शरीर को नींद की स्थिति में रखें।

इससे गहरी मानसिक शांति मिलेगी और अवचेतन स्तर पर ध्यान की स्थिति बनेगी। 🙏

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