Naad ko drasta bhav se sune ya sadharan tarike se

 नाद को द्रष्टा भाव से सुनना ही बेहतर माना जाता है। इसका अर्थ है कि आप नाद को सुनने की कोशिश या उसमें हस्तक्षेप न करें, बल्कि शांत होकर केवल साक्षी बनकर उसे सुनें। ध्यान को नाद पर टिकाएँ, लेकिन यह अपेक्षा न रखें कि कोई विशेष ध्वनि अवश्य सुनाई दे। नाद तेज हो, धीमा हो, बदलता रहे या कुछ समय के लिए बंद हो जाए—हर स्थिति में केवल साक्षी बने रहें। उसे पकड़ने, बढ़ाने या उसका अर्थ निकालने की कोशिश न करें। धीरे-धीरे मन की चंचलता कम होने पर सूक्ष्म ध्वनि अधिक स्पष्ट अनुभव हो सकती है। यही द्रष्टा भाव की साधना है।

Main sapna vul jata hu..roz...dekhta hu or vul jata hu... Yeh prblm 1 month se ho raha hai.. ?

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यदि आप रोज़ सपने देखते हैं लेकिन उन्हें भूल जाते हैं, तो यह संकेत हो सकता है कि आपका अवचेतन मन अधिक सक्रिय हो रहा है। ध्यान और मानसिक उथल-पुथल के कारण मस्तिष्क में सूचना का सही ढंग से संग्रह नहीं हो रहा है। इसे सुधारने के लिए सोने से पहले 5 मिनट ध्यान करें और मन को शांत करें। सुबह उठने के बाद तुरंत सपनों को एक डायरी में लिखने की आदत डालें। इससे मस्तिष्क की याददाश्त मजबूत होगी और सपनों को याद रखने में मदद मिलेगी। ओम जप और प्राणायाम से भी मानसिक स्थिरता आएगी।

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