Naad ko drasta bhav se sune ya sadharan tarike se

 नाद को द्रष्टा भाव से सुनना ही बेहतर माना जाता है। इसका अर्थ है कि आप नाद को सुनने की कोशिश या उसमें हस्तक्षेप न करें, बल्कि शांत होकर केवल साक्षी बनकर उसे सुनें। ध्यान को नाद पर टिकाएँ, लेकिन यह अपेक्षा न रखें कि कोई विशेष ध्वनि अवश्य सुनाई दे। नाद तेज हो, धीमा हो, बदलता रहे या कुछ समय के लिए बंद हो जाए—हर स्थिति में केवल साक्षी बने रहें। उसे पकड़ने, बढ़ाने या उसका अर्थ निकालने की कोशिश न करें। धीरे-धीरे मन की चंचलता कम होने पर सूक्ष्म ध्वनि अधिक स्पष्ट अनुभव हो सकती है। यही द्रष्टा भाव की साधना है।

mene tratak kiya tha ab bar bar dhyan vahi ja rha hai kya karu becheni ho rhi hai kya kru direct open ho rha hai band kese hoga ?

 mene tratak kiya tha ab bar bar dhyan vahi ja rha hai kya karu   becheni ho rhi hai kya kru direct open ho rha hai band kese hoga ?


जब आपने त्राटक किया था, तब आपकी ऊर्जा आज्ञा चक्र (तीसरी आंख) पर केंद्रित हो गई है, जिससे ध्यान बार-बार वहीं जा रहा है। इससे बेचैनी और अस्थिरता महसूस हो रही है। यह संकेत है कि आपकी तीसरी आंख सक्रिय हो रही है। इसे बंद करने के लिए सबसे पहले त्राटक को कुछ समय के लिए रोक दें। गहरी सांस लें और शरीर को रिलैक्स करें। मूलाधार चक्र पर ध्यान केंद्रित करें और "लं" बीज मंत्र का जाप करें। ग्राउंडिंग के लिए नंगे पैर घास पर चलें। ध्यान को नाभि के पास लाएं और श्वास पर केंद्रित रहें। इससे ऊर्जा नीचे की ओर लौटेगी और बेचैनी समाप्त होगी।

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