Naad ko drasta bhav se sune ya sadharan tarike se

 नाद को द्रष्टा भाव से सुनना ही बेहतर माना जाता है। इसका अर्थ है कि आप नाद को सुनने की कोशिश या उसमें हस्तक्षेप न करें, बल्कि शांत होकर केवल साक्षी बनकर उसे सुनें। ध्यान को नाद पर टिकाएँ, लेकिन यह अपेक्षा न रखें कि कोई विशेष ध्वनि अवश्य सुनाई दे। नाद तेज हो, धीमा हो, बदलता रहे या कुछ समय के लिए बंद हो जाए—हर स्थिति में केवल साक्षी बने रहें। उसे पकड़ने, बढ़ाने या उसका अर्थ निकालने की कोशिश न करें। धीरे-धीरे मन की चंचलता कम होने पर सूक्ष्म ध्वनि अधिक स्पष्ट अनुभव हो सकती है। यही द्रष्टा भाव की साधना है।

Mera pair bhi sun ho jada h me or jhatake bhi bahut lagte Hain bo ?

 Mera pair bhi sun ho jada h me or jhatake bhi bahut lagte Hain bo ?


अगर आपके पैर सुन्न हो जाते हैं और झटके बहुत लगते हैं, तो यह संकेत है कि ऊर्जा (प्राण शक्ति) सही तरीके से प्रवाहित नहीं हो रही या असंतुलन हो रहा है

संभावित कारण:

  1. ऊर्जा रुकावट – कुंडलिनी जागरण के कारण ऊर्जा पैरों तक सही से नहीं पहुँच रही।

  2. रक्त संचार समस्या – लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठने से रक्त प्रवाह बाधित हो सकता है।

  3. अति संवेदनशीलता – उन्नत साधना के कारण नर्वस सिस्टम ज्यादा सक्रिय हो सकता है।

उपाय:

  • मूलाधार चक्र को मजबूत करें (लाल रंग का ध्यान करें, "लं" मंत्र जपें)।

  • हल्का योग और पैरों की मालिश करें

  • डरें नहीं, सहज रहें और ऊर्जा प्रवाह को स्वीकारें। 🚩

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