Naad ko drasta bhav se sune ya sadharan tarike se

 नाद को द्रष्टा भाव से सुनना ही बेहतर माना जाता है। इसका अर्थ है कि आप नाद को सुनने की कोशिश या उसमें हस्तक्षेप न करें, बल्कि शांत होकर केवल साक्षी बनकर उसे सुनें। ध्यान को नाद पर टिकाएँ, लेकिन यह अपेक्षा न रखें कि कोई विशेष ध्वनि अवश्य सुनाई दे। नाद तेज हो, धीमा हो, बदलता रहे या कुछ समय के लिए बंद हो जाए—हर स्थिति में केवल साक्षी बने रहें। उसे पकड़ने, बढ़ाने या उसका अर्थ निकालने की कोशिश न करें। धीरे-धीरे मन की चंचलता कम होने पर सूक्ष्म ध्वनि अधिक स्पष्ट अनुभव हो सकती है। यही द्रष्टा भाव की साधना है।

Mere pas swapn sidhi he or me swapn me kahi par bhi pahunch jati hu or nabhi me kuchh khichav hota he to me kya karu ke swapn me kahi par bhi na jau or meri drushti jaldi khul jaye

 Mere pas swapn sidhi he or me swapn me kahi par bhi pahunch jati hu or nabhi me kuchh khichav hota he to me kya karu ke swapn me kahi par bhi na jau or meri drushti jaldi khul jaye ?


स्वप्न सिद्धि एक शक्तिशाली योगिक अवस्था है, जिसमें व्यक्ति स्वप्न के भीतर कहीं भी जा सकता है। लेकिन नाभि में खिंचाव और अनियंत्रित स्वप्न यात्रा से असंतुलन हो सकता है।

इसे नियंत्रित करने के उपाय:

  1. सोने से पहले संकल्प लें – "मैं स्वप्न में यात्रा नहीं करूंगा।"

  2. मूलाधार और नाभि चक्र को संतुलित करें – नियमित भस्त्रिका और मूलबंध करें।

  3. भौतिक जगत से ग्राउंडिंग करें – मिट्टी में नंगे पैर चलें।

  4. गुरु मंत्र या महा मृत्युंजय मंत्र का जाप करें।

  5. रात में ध्यान से बचें, बल्कि शांतिपूर्ण प्रार्थना करें।

अगर अनुभव असहज हो रहा है, तो किसी अनुभवी गुरु से मार्गदर्शन लें।

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