Naad ko drasta bhav se sune ya sadharan tarike se

 नाद को द्रष्टा भाव से सुनना ही बेहतर माना जाता है। इसका अर्थ है कि आप नाद को सुनने की कोशिश या उसमें हस्तक्षेप न करें, बल्कि शांत होकर केवल साक्षी बनकर उसे सुनें। ध्यान को नाद पर टिकाएँ, लेकिन यह अपेक्षा न रखें कि कोई विशेष ध्वनि अवश्य सुनाई दे। नाद तेज हो, धीमा हो, बदलता रहे या कुछ समय के लिए बंद हो जाए—हर स्थिति में केवल साक्षी बने रहें। उसे पकड़ने, बढ़ाने या उसका अर्थ निकालने की कोशिश न करें। धीरे-धीरे मन की चंचलता कम होने पर सूक्ष्म ध्वनि अधिक स्पष्ट अनुभव हो सकती है। यही द्रष्टा भाव की साधना है।

meri 3rd eye per vibration ho rahi hai or ab sare din khichav mahsus hota rahta hai, Ab mujhe kya savdhani rakhni chahiye jisse mera dhyan or ghara ho sake, kirpa margdarshan kare

 meri 3rd eye per vibration ho rahi hai or ab sare din khichav mahsus hota rahta hai, Ab mujhe kya savdhani rakhni chahiye jisse mera dhyan or ghara ho sake, kirpa margdarshan kare ?


तीसरे नेत्र (आज्ञा चक्र) पर कंपन और खिंचाव महसूस होना इस बात का संकेत है कि यह सक्रिय हो रहा है और ऊर्जा प्रवाहित हो रही है। आपको कुछ सावधानियाँ रखनी चाहिए:

  1. ग्राउंडिंग करें – रोज़ सुबह नंगे पैर घास पर चलें या पृथ्वी तत्व से जुड़ाव बढ़ाएं।
  2. शरीर संतुलित रखें – मूलाधार और अनाहत चक्र पर भी ध्यान दें ताकि ऊर्जा समान रूप से बहे।
  3. हल्का भोजन करें – सात्विक आहार लें, तेज मसाले और भारी भोजन से बचें।
  4. ध्यान और प्राणायाम करें – अनुलोम-विलोम और भ्रामरी प्राणायाम से ऊर्जा नियंत्रित होगी।
  5. आंतरिक रूप से शांत रहें – अत्यधिक मानसिक उत्तेजना से बचें और ध्यान को सहज रूप से गहरा करें।

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