Naad ko drasta bhav se sune ya sadharan tarike se

 नाद को द्रष्टा भाव से सुनना ही बेहतर माना जाता है। इसका अर्थ है कि आप नाद को सुनने की कोशिश या उसमें हस्तक्षेप न करें, बल्कि शांत होकर केवल साक्षी बनकर उसे सुनें। ध्यान को नाद पर टिकाएँ, लेकिन यह अपेक्षा न रखें कि कोई विशेष ध्वनि अवश्य सुनाई दे। नाद तेज हो, धीमा हो, बदलता रहे या कुछ समय के लिए बंद हो जाए—हर स्थिति में केवल साक्षी बने रहें। उसे पकड़ने, बढ़ाने या उसका अर्थ निकालने की कोशिश न करें। धीरे-धीरे मन की चंचलता कम होने पर सूक्ष्म ध्वनि अधिक स्पष्ट अनुभव हो सकती है। यही द्रष्टा भाव की साधना है।

Mujko monkey bhut dikhte h dreams m ?

 Mujko monkey bhut dikhte h dreams m ?


सपनों में बार-बार बंदर देखना आपके मन की चंचलता और अवचेतन मन के अस्थिर विचारों का प्रतीक हो सकता है। बंदर आमतौर पर अहंकार, अस्थिरता, और ध्यान में रुकावट का संकेत होते हैं। यह इस बात का संकेत हो सकता है कि मन स्थिर नहीं है और ध्यान के दौरान एकाग्रता में कमी आ रही है। इसे संतुलित करने के लिए अनुलोम-विलोम प्राणायाम करें और सोने से पहले शांत मन से "ॐ" का उच्चारण करें। इसके अलावा, सोने से पहले हनुमान चालीसा का पाठ करें। इससे मन शांत होगा और नकारात्मक ऊर्जा दूर होगी। 🙏


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