mujhe fragnances atti hai jaise hawan ki....dheyan bhi lgta hai ...agge kya kre.

mujhe fragnances atti hai jaise hawan ki....dheyan bhi lgta hai ...agge kya kre...meri body sometimes raat ko ajib c sikudne lgti hai jaise body main kuch khivh rha ho...ye kya hai n agge kya krain ??  यदि ध्यान के दौरान या उसके बाद आपको हवन जैसी सुगंध का अनुभव होता है और ध्यान भी सहज लगने लगता है, तो आध्यात्मिक परंपराओं में ऐसे अनुभवों को कभी-कभी मन की सूक्ष्म एकाग्रता या साधना के दौरान होने वाले आंतरिक अनुभवों के रूप में देखा जाता है। इसी प्रकार, रात में शरीर का सिकुड़ना या भीतर कुछ खिंचने जैसा महसूस होना भी कुछ साधकों को ध्यान के समय अनुभव हो सकता है। लेकिन केवल इन अनुभवों के आधार पर किसी निश्चित आध्यात्मिक अवस्था का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। आपका लक्ष्य अनुभवों का संग्रह नहीं, बल्कि मन की स्थिरता, नाम सिमरन और ईश्वर के प्रति प्रेम होना चाहिए। यदि ये अनुभूतियाँ बिना दर्द और भय के हैं, तो शांत रहकर नियमित साधना जारी रखें। लेकिन यदि शरीर का सिकुड़ना, दर्द, घबराहट या अन्य असामान्य लक्षण बार-बार हों या बढ़ने लगें, तो किसी योग्य चिकित्सक से भी अवश्य जाँच कराएँ, ताकि किसी शारीरिक...

Sir kya 100 dino tak Bramcharya ka palan kare se , or Daily 40 to 45 minute 3rd eye per dyan krne se kya 3rd eye open hoo sakti haii ?

 Sir kya 100 dino tak Bramcharya ka palan kare se , or Daily 40 to 45 minute 3rd eye per dyan krne se kya 3rd eye open hoo sakti haii ?


100 दिन ब्रह्मचर्य और 40-45 मिनट तीसरे नेत्र पर ध्यान करने से क्या तीसरा नेत्र खुल सकता है?

ब्रह्मचर्य और ध्यान का संयोजन तीसरा नेत्र खोलने में सहायक होता है, लेकिन केवल 100 दिन में इसकी कोई गारंटी नहीं। तीसरा नेत्र खोलने के लिए ध्यान की गहराई, नाड़ी शुद्धि, और आंतरिक जागरूकता जरूरी है। कुछ लोगों को महीने लग सकते हैं, कुछ को सालों। यदि ध्यान सही विधि से किया जाए और ऊर्जा को संतुलित रखा जाए, तो तीसरा नेत्र जागरण संभव है।

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