Naad ko drasta bhav se sune ya sadharan tarike se

 नाद को द्रष्टा भाव से सुनना ही बेहतर माना जाता है। इसका अर्थ है कि आप नाद को सुनने की कोशिश या उसमें हस्तक्षेप न करें, बल्कि शांत होकर केवल साक्षी बनकर उसे सुनें। ध्यान को नाद पर टिकाएँ, लेकिन यह अपेक्षा न रखें कि कोई विशेष ध्वनि अवश्य सुनाई दे। नाद तेज हो, धीमा हो, बदलता रहे या कुछ समय के लिए बंद हो जाए—हर स्थिति में केवल साक्षी बने रहें। उसे पकड़ने, बढ़ाने या उसका अर्थ निकालने की कोशिश न करें। धीरे-धीरे मन की चंचलता कम होने पर सूक्ष्म ध्वनि अधिक स्पष्ट अनुभव हो सकती है। यही द्रष्टा भाव की साधना है।

Sir kya 100 dino tak Bramcharya ka palan kare se , or Daily 40 to 45 minute 3rd eye per dyan krne se kya 3rd eye open hoo sakti haii ?

 Sir kya 100 dino tak Bramcharya ka palan kare se , or Daily 40 to 45 minute 3rd eye per dyan krne se kya 3rd eye open hoo sakti haii ?


100 दिन ब्रह्मचर्य और 40-45 मिनट तीसरे नेत्र पर ध्यान करने से क्या तीसरा नेत्र खुल सकता है?

ब्रह्मचर्य और ध्यान का संयोजन तीसरा नेत्र खोलने में सहायक होता है, लेकिन केवल 100 दिन में इसकी कोई गारंटी नहीं। तीसरा नेत्र खोलने के लिए ध्यान की गहराई, नाड़ी शुद्धि, और आंतरिक जागरूकता जरूरी है। कुछ लोगों को महीने लग सकते हैं, कुछ को सालों। यदि ध्यान सही विधि से किया जाए और ऊर्जा को संतुलित रखा जाए, तो तीसरा नेत्र जागरण संभव है।

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