mujhe fragnances atti hai jaise hawan ki....dheyan bhi lgta hai ...agge kya kre.

mujhe fragnances atti hai jaise hawan ki....dheyan bhi lgta hai ...agge kya kre...meri body sometimes raat ko ajib c sikudne lgti hai jaise body main kuch khivh rha ho...ye kya hai n agge kya krain ??  यदि ध्यान के दौरान या उसके बाद आपको हवन जैसी सुगंध का अनुभव होता है और ध्यान भी सहज लगने लगता है, तो आध्यात्मिक परंपराओं में ऐसे अनुभवों को कभी-कभी मन की सूक्ष्म एकाग्रता या साधना के दौरान होने वाले आंतरिक अनुभवों के रूप में देखा जाता है। इसी प्रकार, रात में शरीर का सिकुड़ना या भीतर कुछ खिंचने जैसा महसूस होना भी कुछ साधकों को ध्यान के समय अनुभव हो सकता है। लेकिन केवल इन अनुभवों के आधार पर किसी निश्चित आध्यात्मिक अवस्था का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। आपका लक्ष्य अनुभवों का संग्रह नहीं, बल्कि मन की स्थिरता, नाम सिमरन और ईश्वर के प्रति प्रेम होना चाहिए। यदि ये अनुभूतियाँ बिना दर्द और भय के हैं, तो शांत रहकर नियमित साधना जारी रखें। लेकिन यदि शरीर का सिकुड़ना, दर्द, घबराहट या अन्य असामान्य लक्षण बार-बार हों या बढ़ने लगें, तो किसी योग्य चिकित्सक से भी अवश्य जाँच कराएँ, ताकि किसी शारीरिक...

2 sal Ho Gaye brahmcharya ke fir bhi meri buddhi dur nahin ho rahi bahut Mantra jab bhi aasan kiye ekadam sahi tarah se brahmchari kar raha hun fir bhi Aisa kyon ?

 2 sal Ho Gaye brahmcharya ke fir bhi meri buddhi dur nahin ho rahi bahut Mantra jab bhi aasan kiye ekadam sahi tarah se brahmchari kar raha hun fir bhi Aisa kyon ?


ब्रहमचर्य का पालन करने के बावजूद बुद्धि स्थिर न होना और मन का नियंत्रित न रहना आत्मसंयम व आंतरिक शुद्धि की गहराई को दर्शाता है। केवल बाह्य नियमों से नहीं, बल्कि अंतर्मुखी साधना से भी मन को वश में करना ज़रूरी है।

🔹 क्या करें?

  • अहंकार व वासनाओं की गहराई से जांच करें, क्या कोई सूक्ष्म इच्छा शेष है?

  • गहरी श्वास, प्राणायाम (नाड़ी शोधन, भ्रामरी) करें

  • गुरुदेव, इष्टदेव के चरणों में समर्पण करें और मन से विनम्रता बढ़ाएं।

  • शुद्ध आहार, सत्संग, सेवा और मौन अपनाएं।

समय और साधना के साथ बुद्धि निर्मल होगी। धैर्य रखें। 🙏✨

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