Naad ko drasta bhav se sune ya sadharan tarike se

 नाद को द्रष्टा भाव से सुनना ही बेहतर माना जाता है। इसका अर्थ है कि आप नाद को सुनने की कोशिश या उसमें हस्तक्षेप न करें, बल्कि शांत होकर केवल साक्षी बनकर उसे सुनें। ध्यान को नाद पर टिकाएँ, लेकिन यह अपेक्षा न रखें कि कोई विशेष ध्वनि अवश्य सुनाई दे। नाद तेज हो, धीमा हो, बदलता रहे या कुछ समय के लिए बंद हो जाए—हर स्थिति में केवल साक्षी बने रहें। उसे पकड़ने, बढ़ाने या उसका अर्थ निकालने की कोशिश न करें। धीरे-धीरे मन की चंचलता कम होने पर सूक्ष्म ध्वनि अधिक स्पष्ट अनुभव हो सकती है। यही द्रष्टा भाव की साधना है।

मुझे बहुत से लोगो ने बोला है, कि तुम्हारे पितर को उल्टा कर दिया है उनके साथ उनके बीच गंदी शक्ति लगा दी है, क्या ठीक कैसे करे में 40 40- दिन बैठा बी हू ...

 मुझे बहुत से लोगो ने बोला है, कि तुम्हारे पितर को उल्टा कर दिया है उनके साथ उनके बीच गंदी शक्ति लगा दी है, क्या ठीक कैसे करे में 40 40- दिन बैठा बी हू ठीक करने के लिए, jab fir puchta hu kisi Sai fir vase he bolte hai sab kau nahi theek ho raha? Battye plz?


आपके मन में जो सवाल है वह बहुत ही गहरा और भावनात्मक है। यदि किसी ने आपको यह कहा है कि आपके पितरों को “उल्टा कर दिया गया है” या किसी नकारात्मक शक्ति से बाँध दिया गया है, तो यह एक गंभीर आध्यात्मिक चिंता का विषय बन सकता है। लेकिन घबराने की आवश्यकता नहीं है।

पितृ दोष या ऐसी बाधाओं को शांत करने के लिए आप ये उपाय कर सकती हैं:

  1. नियमित पिंडदान और पितृ तर्पण करें, विशेषकर अमावस्या के दिन या पितृपक्ष में।

  2. शिवलिंग पर जल अर्पण करते हुए “ॐ नमः शिवाय” का जप करें।

  3. पीपल वृक्ष की सेवा करें – हर शनिवार जल चढ़ाएं और दीपक जलाएं।

  4. गरुड़ पुराण का श्रवण या पाठ लाभदायक होता है।

  5. किसी भरोसेमंद और श्रद्धालु गुरु या ब्राह्मण से मार्गदर्शन लें।

सबसे ज़रूरी बात – श्रद्धा और सब्र बनाए रखें। ईश्वर कृपा ज़रूर करेगा।

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