Naad ko drasta bhav se sune ya sadharan tarike se

 नाद को द्रष्टा भाव से सुनना ही बेहतर माना जाता है। इसका अर्थ है कि आप नाद को सुनने की कोशिश या उसमें हस्तक्षेप न करें, बल्कि शांत होकर केवल साक्षी बनकर उसे सुनें। ध्यान को नाद पर टिकाएँ, लेकिन यह अपेक्षा न रखें कि कोई विशेष ध्वनि अवश्य सुनाई दे। नाद तेज हो, धीमा हो, बदलता रहे या कुछ समय के लिए बंद हो जाए—हर स्थिति में केवल साक्षी बने रहें। उसे पकड़ने, बढ़ाने या उसका अर्थ निकालने की कोशिश न करें। धीरे-धीरे मन की चंचलता कम होने पर सूक्ष्म ध्वनि अधिक स्पष्ट अनुभव हो सकती है। यही द्रष्टा भाव की साधना है।

ध्यान के बाद उल्टी सी क्यू लगती है कभी कभी हरा कलर भी दिखता है?

 ध्यान के बाद उल्टी सी क्यू लगती है कभी कभी हरा कलर भी दिखता है?


ध्यान के बाद उल्टी जैसा लगना और कभी-कभी हरे रंग का दिखना शारीरिक और मानसिक शुद्धिकरण (cleansing) का संकेत हो सकता है। ध्यान करते समय जब भीतर की दबी हुई ऊर्जा या नकारात्मकता बाहर निकलती है, तो शरीर प्रतिक्रिया स्वरूप मतली जैसा अनुभव करा सकता है। हरा रंग हृदय (अनाहत) चक्र से जुड़ा होता है, जो भावनाओं, करुणा और हीलिंग का केंद्र है। इसका दिखना चक्र की सक्रियता या खुलने का संकेत है।

उपाय:

  1. ध्यान के बाद कुछ देर खुली हवा में टहलें।

  2. गुनगुना पानी पिएं।

  3. ध्यान के पहले हल्का खाना लें।

  4. शीतल प्राणायाम करें।

सब सामान्य है, घबराएँ नहीं।

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