Naad ko drasta bhav se sune ya sadharan tarike se

 नाद को द्रष्टा भाव से सुनना ही बेहतर माना जाता है। इसका अर्थ है कि आप नाद को सुनने की कोशिश या उसमें हस्तक्षेप न करें, बल्कि शांत होकर केवल साक्षी बनकर उसे सुनें। ध्यान को नाद पर टिकाएँ, लेकिन यह अपेक्षा न रखें कि कोई विशेष ध्वनि अवश्य सुनाई दे। नाद तेज हो, धीमा हो, बदलता रहे या कुछ समय के लिए बंद हो जाए—हर स्थिति में केवल साक्षी बने रहें। उसे पकड़ने, बढ़ाने या उसका अर्थ निकालने की कोशिश न करें। धीरे-धीरे मन की चंचलता कम होने पर सूक्ष्म ध्वनि अधिक स्पष्ट अनुभव हो सकती है। यही द्रष्टा भाव की साधना है।

dhyan ke baad mere aankhon mein aag si nikalti hai jalan Hoti hai aankhon mein ?

 dhyan ke baad mere aankhon mein aag si nikalti hai jalan Hoti hai aankhon mein ?


ध्यान के बाद आंखों में आग सी जलन होना यह संकेत कर सकता है कि आप ध्यान करते समय आंखों पर अधिक दबाव डाल रहे हैं, विशेषकर यदि आप भ्रूमध्य (तीसरी आंख) पर जबरदस्ती ध्यान केंद्रित करते हैं। कभी-कभी लंबा त्राटक, अधिक स्क्रीन टाइम, या ध्यान के दौरान अधिक ऊर्जा का प्रवाह भी आंखों में गर्मी पैदा कर सकता है। ध्यान के बाद कुछ देर आंखें बंद करके ठंडी हथेलियों से सेक करें। गुलाब जल की बूँदें या त्रिफला जल से धोना भी लाभकारी हो सकता है। अगर जलन बनी रहे, तो नेत्र चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।

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