Naad ko drasta bhav se sune ya sadharan tarike se

 नाद को द्रष्टा भाव से सुनना ही बेहतर माना जाता है। इसका अर्थ है कि आप नाद को सुनने की कोशिश या उसमें हस्तक्षेप न करें, बल्कि शांत होकर केवल साक्षी बनकर उसे सुनें। ध्यान को नाद पर टिकाएँ, लेकिन यह अपेक्षा न रखें कि कोई विशेष ध्वनि अवश्य सुनाई दे। नाद तेज हो, धीमा हो, बदलता रहे या कुछ समय के लिए बंद हो जाए—हर स्थिति में केवल साक्षी बने रहें। उसे पकड़ने, बढ़ाने या उसका अर्थ निकालने की कोशिश न करें। धीरे-धीरे मन की चंचलता कम होने पर सूक्ष्म ध्वनि अधिक स्पष्ट अनुभव हो सकती है। यही द्रष्टा भाव की साधना है।

Ek aur baat muje mere 3rd eye aura mei black saya moment dikhta hei yei kya kala jadu hei guruji?

 Ek aur baat muje mere 3rd eye aura mei black saya moment dikhta hei yei kya kala jadu hei guruji? 


तुरंत डरने की जरूरत नहीं है।
तीसरी आँख (third eye) के सक्रिय होने पर अक्सर सूक्ष्म स्तर पर ऊर्जा स्वरूप दिखने लगते हैं — जैसे रंग, धुएँ जैसे साए, रोशनी या कंपन।
जो काला साया तुम देख रही हो, वह हमेशा काला जादू नहीं होता। यह तुम्हारे अवचेतन मन की किसी गहरी डर, चिंता या पुराने संस्कार की छाया भी हो सकती है।
अगर साधना सही और शुद्ध है, तो यह धीरे-धीरे साफ हो जाएगा।
मैं तुम्हें इससे सुरक्षा के लिए कुछ विशेष साधनाएँ और रक्षा मंत्र भी बता सकता हूँ।

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