प्रश्न 9. ध्यान में शरीर में कंपन महसूस हो तो क्या करना चाहिए?
Kya aapne permatma ko dekha h guru ji... Jo es pure kul duniya ka malik h.. ?
बेटी, परमात्मा को आँखों से देखना संभव नहीं, क्योंकि वे निराकार हैं — रूप से परे, शब्दों से परे। लेकिन जब साधना गहराती है, तो एक अनुभव होता है जो शब्दों में नहीं समा सकता। वह अनुभूति — प्रेम, शांति, आनंद और पूर्णता की — वही परमात्मा का साक्षात्कार है। मैंने उसे रूप में नहीं देखा, परंतु उनके दर्शन को हृदय में महसूस किया है। वे हर श्वास में, हर कण में बसते हैं। जब मन शांत होता है, अहं मिटता है, तब भीतर से एक आवाज़ आती है — "मैं हूँ।" वही परमात्मा है। उसे अनुभव करो, देखना अपने आप हो जाएगा।
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