Naad ko drasta bhav se sune ya sadharan tarike se

 नाद को द्रष्टा भाव से सुनना ही बेहतर माना जाता है। इसका अर्थ है कि आप नाद को सुनने की कोशिश या उसमें हस्तक्षेप न करें, बल्कि शांत होकर केवल साक्षी बनकर उसे सुनें। ध्यान को नाद पर टिकाएँ, लेकिन यह अपेक्षा न रखें कि कोई विशेष ध्वनि अवश्य सुनाई दे। नाद तेज हो, धीमा हो, बदलता रहे या कुछ समय के लिए बंद हो जाए—हर स्थिति में केवल साक्षी बने रहें। उसे पकड़ने, बढ़ाने या उसका अर्थ निकालने की कोशिश न करें। धीरे-धीरे मन की चंचलता कम होने पर सूक्ष्म ध्वनि अधिक स्पष्ट अनुभव हो सकती है। यही द्रष्टा भाव की साधना है।

mera muldhar chair par bethne per disturb ho jata hai. Kya karu ?

 mera muldhar chair par bethne per disturb ho jata hai. Kya karu ?


बेटी, यदि कुर्सी पर बैठने से मूलाधार चक्र (Mooladhara Chakra) में असहजता या disturbance होता है, तो यह संकेत है कि बैठने की स्थिति चक्र पर दबाव डाल रही है या ऊर्जा प्रवाह बाधित हो रहा है। मूलाधार चक्र धरती से जुड़ा होता है, और ज़मीन से संपर्क में रहना इसे स्थिर करता है।

उपाय:

  1. ज़मीन पर आसान बिछाकर सुखासन या वज्रासन में बैठें।

  2. अगर कुर्सी ही विकल्प है, तो रीढ़ सीधी रखें और पैरों को ज़मीन से पूरी तरह टच कराएं।

  3. "लं" बीज मंत्र का जाप करें।

  4. मूलाधार पर ध्यान केंद्रित कर grounding visualisation करें।

धीरे-धीरे संतुलन आने लगेगा।

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