Naad ko drasta bhav se sune ya sadharan tarike se

 नाद को द्रष्टा भाव से सुनना ही बेहतर माना जाता है। इसका अर्थ है कि आप नाद को सुनने की कोशिश या उसमें हस्तक्षेप न करें, बल्कि शांत होकर केवल साक्षी बनकर उसे सुनें। ध्यान को नाद पर टिकाएँ, लेकिन यह अपेक्षा न रखें कि कोई विशेष ध्वनि अवश्य सुनाई दे। नाद तेज हो, धीमा हो, बदलता रहे या कुछ समय के लिए बंद हो जाए—हर स्थिति में केवल साक्षी बने रहें। उसे पकड़ने, बढ़ाने या उसका अर्थ निकालने की कोशिश न करें। धीरे-धीरे मन की चंचलता कम होने पर सूक्ष्म ध्वनि अधिक स्पष्ट अनुभव हो सकती है। यही द्रष्टा भाव की साधना है।

mera naam Sonu mujhe negativity hai Jalebi mein gehre Dhyan mein chala jata hun kuchh acche Anubhav hote Hain to gande sapne aate Hain kaise bache ?

 mera naam Sonu mujhe negativity hai Jalebi mein gehre Dhyan mein chala jata hun kuchh acche Anubhav hote Hain to gande sapne aate Hain kaise bache ?


Sonu ji, जब आप गहरे ध्यान में जाते हैं और अच्छे अनुभव होते हैं, तो नकारात्मक शक्तियाँ बाधा डालने की कोशिश कर सकती हैं, जिससे गंदे सपने या डरावनी अनुभूतियाँ आती हैं। यह साधना की परीक्षा होती है। बचाव के लिए रोज़ सकारात्मक मंत्र जैसे “ॐ नमः शिवाय” या “राम राम” का जप करें। सोने से पहले हनुमान चालीसा या दुर्गा कवच पढ़ें। कमरे में दीपक जलाएं और गंगाजल छिड़कें। ध्यान के बाद साक्षी भाव बनाए रखें और डर से मुक्त रहें। आप ईश्वर की शरण में हैं, कोई भी नकारात्मकता आपको नुकसान नहीं पहुँचा सकती।

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