mujhe fragnances atti hai jaise hawan ki....dheyan bhi lgta hai ...agge kya kre.

mujhe fragnances atti hai jaise hawan ki....dheyan bhi lgta hai ...agge kya kre...meri body sometimes raat ko ajib c sikudne lgti hai jaise body main kuch khivh rha ho...ye kya hai n agge kya krain ??  यदि ध्यान के दौरान या उसके बाद आपको हवन जैसी सुगंध का अनुभव होता है और ध्यान भी सहज लगने लगता है, तो आध्यात्मिक परंपराओं में ऐसे अनुभवों को कभी-कभी मन की सूक्ष्म एकाग्रता या साधना के दौरान होने वाले आंतरिक अनुभवों के रूप में देखा जाता है। इसी प्रकार, रात में शरीर का सिकुड़ना या भीतर कुछ खिंचने जैसा महसूस होना भी कुछ साधकों को ध्यान के समय अनुभव हो सकता है। लेकिन केवल इन अनुभवों के आधार पर किसी निश्चित आध्यात्मिक अवस्था का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। आपका लक्ष्य अनुभवों का संग्रह नहीं, बल्कि मन की स्थिरता, नाम सिमरन और ईश्वर के प्रति प्रेम होना चाहिए। यदि ये अनुभूतियाँ बिना दर्द और भय के हैं, तो शांत रहकर नियमित साधना जारी रखें। लेकिन यदि शरीर का सिकुड़ना, दर्द, घबराहट या अन्य असामान्य लक्षण बार-बार हों या बढ़ने लगें, तो किसी योग्य चिकित्सक से भी अवश्य जाँच कराएँ, ताकि किसी शारीरिक...

Meri ma 5 sal se wahegur ka jap kr rhi hai ab us ke muh me jhaag bn rha hai or uss ko boht gandi smell aa rhi hai vo kia kre please bta do bar bar pani peeti hai buht bura hall hai kia kre

 Meri ma 5 sal se wahegur ka jap kr rhi hai ab us ke muh me jhaag bn rha hai or uss ko boht gandi smell aa rhi hai vo kia kre please bta do bar bar pani peeti hai buht bura hall hai kia kre ?


आपकी माँ के साथ जो हो रहा है, वह ऊर्जा परिवर्तन या शरीर की प्रतिक्रिया हो सकती है। जप और साधना के कारण कई बार शरीर शुद्धि प्रक्रिया से गुजरता है, जिससे झाग बनना और दुर्गंध आना हो सकता है।

क्या करें?

  1. आयुर्वेदिक उपाय – त्रिफला पानी से कुल्ला करें, गुनगुना पानी पिएं।

  2. भोजन पर ध्यान दें – हल्का, सात्विक आहार लें, तामसिक चीज़ों से बचें।

  3. मंत्र का संतुलन – जप ज़रूरत से ज़्यादा न करें, धीरे-धीरे बढ़ाएं।

  4. गुरु या किसी ज्ञानी से परामर्श लें – यह ऊर्जा असंतुलन भी हो सकता है।

यदि समस्या गंभीर हो, तो किसी चिकित्सक से भी परामर्श लें।

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