Naad ko drasta bhav se sune ya sadharan tarike se

 नाद को द्रष्टा भाव से सुनना ही बेहतर माना जाता है। इसका अर्थ है कि आप नाद को सुनने की कोशिश या उसमें हस्तक्षेप न करें, बल्कि शांत होकर केवल साक्षी बनकर उसे सुनें। ध्यान को नाद पर टिकाएँ, लेकिन यह अपेक्षा न रखें कि कोई विशेष ध्वनि अवश्य सुनाई दे। नाद तेज हो, धीमा हो, बदलता रहे या कुछ समय के लिए बंद हो जाए—हर स्थिति में केवल साक्षी बने रहें। उसे पकड़ने, बढ़ाने या उसका अर्थ निकालने की कोशिश न करें। धीरे-धीरे मन की चंचलता कम होने पर सूक्ष्म ध्वनि अधिक स्पष्ट अनुभव हो सकती है। यही द्रष्टा भाव की साधना है।

Muje teesre netre pr nhi lekin mathe par bhot shoti 2-3 roshni timtimati dikhti hai 1sec k liye fir buj jati hai. Mera third eye kab khulega ?

 Muje teesre netre pr nhi lekin mathe par bhot shoti 2-3 roshni timtimati dikhti hai 1sec k liye fir buj jati hai. Mera third eye kab khulega ?


जो छोटी-सी रोशनी आपके माथे पर दिखती है, वह सूक्ष्म ऊर्जा का संकेत हो सकता है, जो आपके आज्ञा चक्र (Third Eye) के जागरण की ओर इशारा कर रहा है। ये रोशनी कुछ समय के लिए दिखती हैं क्योंकि आपकी ऊर्जा और ध्यान धीरे-धीरे उस दिशा में विकसित हो रहे हैं। ध्यान, प्राणायाम, और नियमित साधना से यह चक्र धीरे-धीरे खुलने लगेगा। महत्वपूर्ण है कि आप सकारात्मक सोच और धैर्य रखें। तीसरे नेत्र का खुलना समय ले सकता है, लेकिन निरंतर साधना से यह अनुभव और अधिक स्पष्ट हो जाएगा।

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