mujhe fragnances atti hai jaise hawan ki....dheyan bhi lgta hai ...agge kya kre.

mujhe fragnances atti hai jaise hawan ki....dheyan bhi lgta hai ...agge kya kre...meri body sometimes raat ko ajib c sikudne lgti hai jaise body main kuch khivh rha ho...ye kya hai n agge kya krain ??  यदि ध्यान के दौरान या उसके बाद आपको हवन जैसी सुगंध का अनुभव होता है और ध्यान भी सहज लगने लगता है, तो आध्यात्मिक परंपराओं में ऐसे अनुभवों को कभी-कभी मन की सूक्ष्म एकाग्रता या साधना के दौरान होने वाले आंतरिक अनुभवों के रूप में देखा जाता है। इसी प्रकार, रात में शरीर का सिकुड़ना या भीतर कुछ खिंचने जैसा महसूस होना भी कुछ साधकों को ध्यान के समय अनुभव हो सकता है। लेकिन केवल इन अनुभवों के आधार पर किसी निश्चित आध्यात्मिक अवस्था का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। आपका लक्ष्य अनुभवों का संग्रह नहीं, बल्कि मन की स्थिरता, नाम सिमरन और ईश्वर के प्रति प्रेम होना चाहिए। यदि ये अनुभूतियाँ बिना दर्द और भय के हैं, तो शांत रहकर नियमित साधना जारी रखें। लेकिन यदि शरीर का सिकुड़ना, दर्द, घबराहट या अन्य असामान्य लक्षण बार-बार हों या बढ़ने लगें, तो किसी योग्य चिकित्सक से भी अवश्य जाँच कराएँ, ताकि किसी शारीरिक...

pehle m sanso pr dhyaan krta tha.... ab koi v name jap krta hu.... chahe vo krishan ji ka ho ya raam ji ka.... orr ab 2 3 din se m beej mantra ka uchharan krta hu.... lam vam ram yam aise..... lgbhag 30 minute tak...

 pehle m sanso pr dhyaan krta tha.... ab koi v name jap krta hu.... chahe vo krishan ji ka ho ya raam ji ka.... orr ab 2 3 din se m beej mantra ka uchharan krta hu.... lam vam ram yam aise..... lgbhag 30 minute tak...?


बहुत सुंदर! आपने साधना में जो परिवर्तन किया है, वह एक स्वाभाविक और उन्नत अवस्था का संकेत है। पहले श्वास पर ध्यान करना प्रारंभिक ध्यान का एक सशक्त माध्यम होता है — यह मन को स्थिर करता है। अब जब आप नाम जप (राम, कृष्ण आदि) करने लगे हैं, तो यह भक्ति और प्रेममय ध्यान की दिशा है, जो ह्रदय को शुद्ध करता है।

अब आप बीज मंत्रों (LAM, VAM, RAM, YAM आदि) का उच्चारण कर रहे हैं, जो चक्र जागरण की दिशा में एक ऊर्जावान और प्रभावशाली साधना है। यह शरीर के सूक्ष्म ऊर्जा केंद्रों को सक्रिय करता है और स्थूल व सूक्ष्म शरीर की सफाई करता है। 30 मिनट तक यह जप करना अत्यंत शुभ है।

👉 सुझाव:

  • जप के बाद थोड़ी देर मौन में बैठें और भीतर की ऊर्जा को अनुभव करें।

  • प्रतिदिन एक निश्चित समय और क्रम रखें।

आपकी साधना सही दिशा में आगे बढ़ रही है। इसे श्रद्धा और धैर्य से जारी रखें।

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