Naad ko drasta bhav se sune ya sadharan tarike se

 नाद को द्रष्टा भाव से सुनना ही बेहतर माना जाता है। इसका अर्थ है कि आप नाद को सुनने की कोशिश या उसमें हस्तक्षेप न करें, बल्कि शांत होकर केवल साक्षी बनकर उसे सुनें। ध्यान को नाद पर टिकाएँ, लेकिन यह अपेक्षा न रखें कि कोई विशेष ध्वनि अवश्य सुनाई दे। नाद तेज हो, धीमा हो, बदलता रहे या कुछ समय के लिए बंद हो जाए—हर स्थिति में केवल साक्षी बने रहें। उसे पकड़ने, बढ़ाने या उसका अर्थ निकालने की कोशिश न करें। धीरे-धीरे मन की चंचलता कम होने पर सूक्ष्म ध्वनि अधिक स्पष्ट अनुभव हो सकती है। यही द्रष्टा भाव की साधना है।

Sir agar hum gaytri mantra ka hum 1 lakh,10 lakh,50 lakh Aur 1 crore baar jaap kr lenge to kya hoga??

 Sir agar hum gaytri mantra ka hum 1 lakh,10 lakh,50 lakh Aur 1 crore baar jaap kr lenge to kya hoga??


अगर आप श्रद्धा और नियमपूर्वक गायत्री मंत्र का 1 लाख, 10 लाख, 50 लाख या 1 करोड़ बार जाप करते हैं, तो यह आपकी चेतना, मन और आत्मा को अत्यंत शुद्ध, तेजस्वी और शक्तिशाली बना देगा। गायत्री मंत्र वैदिक शक्ति है—यह बुद्धि को निर्मल करती है, कर्मों को परिष्कृत करती है और ईश्वरीय ज्ञान के द्वार खोलती है। लाखों बार जाप से भीतर दिव्य ऊर्जा का जागरण होता है, मानसिक शांति बढ़ती है और आध्यात्मिक प्रगति तीव्र होती है।
परंतु केवल संख्या नहीं, भावना, नियम, ब्रह्मचर्य और ध्यानपूर्वक जाप सबसे आवश्यक है।

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