पहले सिर्फ ध्यान हि करता था जाप नही तब भी third eye के अनुभव होते थे अब 4 माह से om namah shivay का जाप करता हु तो अनुभव ज्यादा होते है क्या सिर्फ जाप हि करु या ध्यान भी ??

 पहले सिर्फ ध्यान हि करता था जाप नही तब भी third eye के अनुभव होते थे अब 4 माह से om namah shivay का जाप करता हु तो अनुभव ज्यादा होते है क्या सिर्फ जाप हि करु या ध्यान भी ??


पहले जब आप सिर्फ ध्यान करते थे और जाप नहीं, तब भी तीसरी आँख (third eye) के अनुभव हो रहे थे — इसका मतलब है कि आपकी साधना में प्राकृतिक गहराई है। अब जब आप 4 महीने से "ॐ नमः शिवाय" का जाप कर रहे हैं, तो अनुभव और भी तेज हो गए हैं, जो बहुत शुभ संकेत है। जाप (मंत्र शक्ति) और ध्यान (शांति शक्ति) दोनों मिलकर साधना को पूर्ण बनाते हैं।
इसलिए केवल जाप या केवल ध्यान नहीं, दोनों का संतुलन जरूरी है।
पहले जाप करो, फिर उसी ऊर्जा में ध्यान में बैठो।

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