guru jee kuch dino pahle tk third eye me Blue colour ki screen dikhai deti thi pr ab kabhi kabhi green.........

Guru jee kuch dino pahle tk third eye me Blue colour ki screen dikhai deti thi pr ab kabhi kabhi green colour second time ke liye aata hai fir kuch nhi dikh rha पहले तीसरी आंख में नीले रंग की स्क्रीन दिखना शांति, गहराई और आध्यात्मिक सुरक्षा का संकेत था। अब बीच-बीच में हरे रंग का आना दर्शाता है कि आपकी साधना की ऊर्जा हीलिंग, संतुलन और हृदय चक्र से जुड़ाव की ओर बढ़ रही है। यह रंग परिवर्तन सामान्य है और साधना के विभिन्न चरणों में होता है। कुछ समय तक रंग न दिखना भी संकेत है कि चेतना आंतरिक स्थिरता ले रही है और मन को विश्राम चाहिए। इसे रुकावट न समझें, बल्कि अभ्यास जारी रखें। धैर्य और नामजप से आगे और गहरे अनुभव होंगे।

ब्रह्ममुहूर्त की रहस्यमयी कथा | रोज सुबह 3 से 6 उठकर 7 दिन तक करें यह काम फिर देखे चमत्कार।?

 ब्रह्ममुहूर्त की रहस्यमयी कथा | रोज सुबह 3 से 6 उठकर 7 दिन तक करें यह काम फिर देखे चमत्कार।?


भारतीय योगशास्त्र, आयुर्वेद और वेदों में ब्रह्ममुहूर्त को अत्यंत शुभ, पवित्र और रहस्यमयी समय बताया गया है। यह वह समय है जब सृष्टि की चेतना उच्चतम स्तर पर होती है, वातावरण में शांति और ऊर्जा दोनों सर्वोच्च रूप में विद्यमान होती हैं। यदि कोई व्यक्ति प्रतिदिन ब्रह्ममुहूर्त में उठकर विशेष साधना करे, तो सात ही दिन में उसका जीवन, चित्त और ऊर्जा स्तर पर आश्चर्यजनक परिवर्तन आने लगता है।

आज हम ब्रह्ममुहूर्त की रहस्यमयी कथा, वैज्ञानिक पक्ष, आध्यात्मिक महत्व और 7 दिनों की दिव्य साधना का रहस्य साझा करेंगे।


🔱 ब्रह्ममुहूर्त क्या है?

ब्रह्ममुहूर्त एक वैदिक समयावधि है, जो सूर्योदय से लगभग डेढ़ घंटे पूर्व प्रारंभ होती है। इसका समय आमतौर पर प्रातः 3:30 से 5:30 या 6:00 बजे तक होता है। यह समय न तो पूर्ण रूप से रात्रि होता है, न ही पूर्ण रूप से दिन — यह सन्धि का काल होता है। इस समय को देवताओं का काल कहा गया है क्योंकि वातावरण में सात्विकता अधिक होती है और तमोगुण सबसे न्यूनतम अवस्था में होता है।


📜 ब्रह्ममुहूर्त की रहस्यमयी कथा

पुराणों में ब्रह्ममुहूर्त से जुड़ी कई कथाएँ मिलती हैं। एक प्रमुख कथा महर्षि वशिष्ठ और विश्वामित्र से जुड़ी है।

कहा जाता है कि महर्षि विश्वामित्र जब कठोर तपस्या कर रहे थे, तब इन्द्र ने उनकी साधना भंग करने के लिए कई प्रयास किए। मगर जब ब्रह्ममुहूर्त में वे ध्यानस्थ रहते थे, तब उनकी ऊर्जा इतनी उन्नत हो जाती थी कि कोई भी दैविक या मायावी शक्ति उनका ध्यान नहीं भटका सकती थी। ब्रह्मा जी स्वयं उन्हें दर्शन देकर बोले – "हे विश्वामित्र, ब्रह्ममुहूर्त में तुम्हारी साधना ब्रह्मलोक तक पहुंच रही है। यही समय है जब ब्रह्म से जुड़ना सरल होता है।"

यह कथा हमें बताती है कि ब्रह्ममुहूर्त साधना का समय नहीं, परमात्मा से सीधा संपर्क स्थापित करने का क्षण होता है।


🧘‍♂️ वैज्ञानिक दृष्टिकोण से ब्रह्ममुहूर्त

आधुनिक विज्ञान भी ब्रह्ममुहूर्त के लाभों को सिद्ध करता है:

  1. मेलाटोनिन और सेरोटोनिन का संतुलन: यह समय हार्मोन बैलेंस का होता है। मेलाटोनिन नींद से बाहर निकल रहा होता है, और सेरोटोनिन (हर्ष और आनंद का हार्मोन) सक्रिय होने लगता है।

  2. वातावरण में ऑक्सीजन का स्तर उच्चतम: सुबह 4 बजे के आसपास वायुमंडल में प्राणवायु (ऑक्सीजन) की मात्रा अधिक होती है, जिससे श्वसन क्रिया से ऊर्जा स्तर तीव्र होता है।

  3. मस्तिष्क की तरंगें शांत होती हैं: इस समय ब्रेन वेव्स (α और θ वेव्स) ध्यान और अंतर्ज्ञान के लिए उपयुक्त होती हैं।

  4. शरीर का आत्मशुद्धिकरण: आयुर्वेद में यह समय मल त्याग, शरीर शुद्धि और मन की निर्मलता के लिए सर्वोत्तम बताया गया है।


🕉️ ब्रह्ममुहूर्त में 7 दिन तक करें यह दिव्य प्रयोग

यदि आप लगातार 7 दिनों तक ब्रह्ममुहूर्त में उठकर नीचे बताए गए 7 कार्य करें, तो न केवल आप चमत्कारी अनुभव करेंगे, बल्कि जीवन में स्थायी परिवर्तन भी आएंगे:


🌅 1. जल्दी उठना और मौन धारण (सुबह 3:30 से 4:00)

  • जैसे ही आप उठें, एक ग्लास गुनगुना पानी पीकर शौच आदि से निवृत्त हो जाएं।

  • इसके बाद कम से कम 15 मिनट तक मौन में बैठें।

  • इस मौन अवस्था में मन को स्थिर करें, और नकारात्मक विचारों को जाने दें।

🧠 लाभ: मानसिक तनाव कम होगा, विचारों की गहराई बढ़ेगी।


🔥 2. दीपक जलाकर ध्यान (4:00 से 4:30)

  • शांत स्थान पर बैठकर एक दीपक जलाएं और उसकी लौ को ध्यानपूर्वक देखें (त्राटक करें)।

  • इसके बाद आँखें बंद कर लें और धीरे-धीरे श्वास लें-छोड़ें।

🧘 लाभ: आज्ञा चक्र सक्रिय होगा, अंतर्ज्ञान जागेगा, ध्यान की गहराई बढ़ेगी।


📿 3. मंत्र जप (4:30 से 5:00)

  • किसी एक मंत्र का जप करें – जैसे "ॐ नमः शिवाय", "ॐ गं गणपतये नमः", या "ॐ"।

  • मन से जप करें, माला का प्रयोग करें, और भावनाओं के साथ करें।

🔮 लाभ: जप से चेतना में शक्ति आती है, आत्मबल बढ़ता है और ऊर्जा का स्तर जागृत होता है।


🧘‍♀️ 4. प्राणायाम (5:00 से 5:15)

  • अनुलोम-विलोम, कपालभाति और भ्रामरी करें।

  • प्रत्येक प्राणायाम को शांति से करें और सांस पर ध्यान केंद्रित करें।

🌬️ लाभ: शरीर में ऑक्सीजन का संचार, ऊर्जा का प्रवाह, और चक्रों का संतुलन बनता है।


📓 5. ध्यान-जर्नलिंग (5:15 से 5:30)

  • जो भी आपने ध्यान में अनुभव किया, उसे एक डायरी में लिखें।

  • कोई स्वप्न, भावना, प्रकाश, या विचार – सब कुछ लिखें।

📝 लाभ: आत्मनिरीक्षण और अंतर्ज्ञान तेज होगा, आत्मसमझ बढ़ेगी।


🌞 6. सूर्य को नमस्कार और प्रणाम (5:30 से 6:00)

  • पूर्व दिशा में सूर्य के उगने से पहले हाथ जोड़कर नमस्कार करें।

  • सूर्य गायत्री मंत्र या "ॐ सूर्याय नमः" का जप करें।

☀️ लाभ: ऊर्जा, आत्मबल और शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होगी।


💖 7. संकल्प और सेवा का भाव (दिनभर के लिए)

  • ब्रह्ममुहूर्त में एक छोटा संकल्प लें – जैसे "मैं आज क्रोध नहीं करूंगी", "मैं हर व्यक्ति से प्रेम करूंगी", "मैं किसी की मदद करूंगी।"

  • इस संकल्प को दिनभर याद रखें और उसका पालन करें।

🕊️ लाभ: आत्मिक बल और नैतिक शक्ति बढ़ेगी, करुणा और भक्ति जागृत होगी।


✨ क्या होंगे परिणाम 7 दिनों बाद?

यदि आप लगातार 7 दिन तक ऊपर बताए गए अभ्यास ब्रह्ममुहूर्त में करें, तो आपको निम्नलिखित दिव्य अनुभव हो सकते हैं:

  1. मन में शांति और स्थिरता

  2. आज्ञा चक्र पर कंपन या प्रकाश का अनुभव

  3. सुगंधों का आना, आंतरिक आवाज सुनाई देना

  4. स्वप्नों में दिव्य संकेत या पूर्वाभास

  5. कर्मों की गति में परिवर्तन

  6. मंत्र-जप में गहराई और भक्ति की वृद्धि

  7. संकल्प शक्ति में वृद्धि और आत्मविश्वास का जागरण


📚 ब्रह्ममुहूर्त से जुड़े कुछ रोचक तथ्य:

  • भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में कहा है: "यज्ञ, दान और तप का सबसे उत्तम समय ब्रह्ममुहूर्त है।"

  • शंकराचार्य, रामकृष्ण परमहंस, और अनेक योगियों ने ब्रह्ममुहूर्त को अपने साधना जीवन का आधार बताया है।

  • तुलसीदास जी ने लिखा है – “ब्रह्ममुहूर्त उठि करि रघुनाथा, माथे तिलक धरि धरि धरि बाथा।”


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