Naad ko drasta bhav se sune ya sadharan tarike se

 नाद को द्रष्टा भाव से सुनना ही बेहतर माना जाता है। इसका अर्थ है कि आप नाद को सुनने की कोशिश या उसमें हस्तक्षेप न करें, बल्कि शांत होकर केवल साक्षी बनकर उसे सुनें। ध्यान को नाद पर टिकाएँ, लेकिन यह अपेक्षा न रखें कि कोई विशेष ध्वनि अवश्य सुनाई दे। नाद तेज हो, धीमा हो, बदलता रहे या कुछ समय के लिए बंद हो जाए—हर स्थिति में केवल साक्षी बने रहें। उसे पकड़ने, बढ़ाने या उसका अर्थ निकालने की कोशिश न करें। धीरे-धीरे मन की चंचलता कम होने पर सूक्ष्म ध्वनि अधिक स्पष्ट अनुभव हो सकती है। यही द्रष्टा भाव की साधना है।

aankh band Karte he white prakash Dekhta hai aur ek din aankh mein gole jaisa kuch Nikla ?

 aankh band Karte he white prakash Dekhta hai aur ek din aankh mein gole jaisa kuch Nikla?


जब आप आंखें बंद करते हैं और सफेद प्रकाश देखते हैं, तो यह आज्ञा चक्र (Third Eye) की सक्रियता और आंतरिक चेतना के जागरण का संकेत हो सकता है। सफेद प्रकाश दिव्यता, शुद्ध ऊर्जा और उच्च चेतना से जुड़ा होता है। आंखों में गोल आकार दिखना भी सूक्ष्म दृष्टि (inner vision) का हिस्सा हो सकता है — यह ऊर्जा का एक रूप या प्रतीकात्मक संकेत हो सकता है।

ध्यान रखें:

  1. नियमित ध्यान जारी रखें।

  2. ओम का उच्चारण करें – यह अनुभव को स्थिर करता है।

  3. दृष्टि यदि भारी हो, तो कुछ समय ध्यान रोककर त्राटक करें।

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