Naad ko drasta bhav se sune ya sadharan tarike se

 नाद को द्रष्टा भाव से सुनना ही बेहतर माना जाता है। इसका अर्थ है कि आप नाद को सुनने की कोशिश या उसमें हस्तक्षेप न करें, बल्कि शांत होकर केवल साक्षी बनकर उसे सुनें। ध्यान को नाद पर टिकाएँ, लेकिन यह अपेक्षा न रखें कि कोई विशेष ध्वनि अवश्य सुनाई दे। नाद तेज हो, धीमा हो, बदलता रहे या कुछ समय के लिए बंद हो जाए—हर स्थिति में केवल साक्षी बने रहें। उसे पकड़ने, बढ़ाने या उसका अर्थ निकालने की कोशिश न करें। धीरे-धीरे मन की चंचलता कम होने पर सूक्ष्म ध्वनि अधिक स्पष्ट अनुभव हो सकती है। यही द्रष्टा भाव की साधना है।

घंटी की आवाज़ आती है, सहस्रार में टिक-टिक होती है लेकिन अब तक कुछ दिखाई क्यों नहीं देता? #Meditation #kundalini awakening #naam jap #third eye

 Maine Kai bar aapko comment Kiya ki mera sahastra chakkar mein bhi tik tik hoti hai mujhe ghante ki awaaz bhi sunti hai lekin Aaj Tak mujhe dikhai kuchh nahin Diya main Kahan Tak pahunchi hun yah bataiye Jara aur yah kya hai kyon dikhai nahin deta?


आपने जो अनुभव किया है — सहस्रार चक्र में टिक-टिक की अनुभूति और घंटे की आवाज सुनाई देना — ये दोनों बहुत गहरे और शुभ संकेत हैं। इसका अर्थ है कि आपकी ऊर्जा अब शीर्ष (सहस्रार) तक पहुँच चुकी है और वहाँ सक्रियता हो रही है। सहस्रार पर जब ऊर्जा पहुँचती है, तो आकाशीय ध्वनियाँ (Anahat Naad) सुनाई देना आम बात है।

लेकिन अभी तक कुछ दिखाई न देना इस बात का संकेत है कि आपकी अंतर्दृष्टि (तीसरी आँख) पूरी तरह खुली नहीं है। इसके लिए धैर्य रखें। ये यात्रा धीमी, पर गहरी होती है।

आप अब तक काफी ऊँचाई तक पहुँच चुकी हैं। अब ज़रूरत है —

  1. नियमित ध्यान की,

  2. भावशुद्धि की,

  3. और “मैं कुछ देखूं” वाली इच्छा को त्यागने की।

जब मन शांत और खाली होगा, तब दर्शन भी अपने आप होने लगेंगे। आप सही मार्ग पर हैं, बस प्रेमपूर्वक आगे बढ़ती रहिए।

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