Naad ko drasta bhav se sune ya sadharan tarike se

 नाद को द्रष्टा भाव से सुनना ही बेहतर माना जाता है। इसका अर्थ है कि आप नाद को सुनने की कोशिश या उसमें हस्तक्षेप न करें, बल्कि शांत होकर केवल साक्षी बनकर उसे सुनें। ध्यान को नाद पर टिकाएँ, लेकिन यह अपेक्षा न रखें कि कोई विशेष ध्वनि अवश्य सुनाई दे। नाद तेज हो, धीमा हो, बदलता रहे या कुछ समय के लिए बंद हो जाए—हर स्थिति में केवल साक्षी बने रहें। उसे पकड़ने, बढ़ाने या उसका अर्थ निकालने की कोशिश न करें। धीरे-धीरे मन की चंचलता कम होने पर सूक्ष्म ध्वनि अधिक स्पष्ट अनुभव हो सकती है। यही द्रष्टा भाव की साधना है।

खुली आँखों से लाखों चमकीले तारे जैसे या लाखों चमकीले कीड़े जैसे दिखते हैं

 खुली आँखों से लाखों चमकीले तारे जैसे या लाखों चमकीले कीड़े जैसे दिखते हैं और अब तो यदा कदा खुली आँखों से हवा चलते हुए दिखती है। पर कभी समझ नहीं आया ये सब क्या है 


खुली आँखों से लाखों चमकीले तारे या कीड़ों जैसे कण दिखना, और हवा का बहना दिखाई देना—ये सब सूक्ष्म दृष्टि (subtle vision) के जागरण के लक्षण हो सकते हैं। जब ध्यान या साधना से भीतर की इंद्रियाँ (अंतःकरण) जागने लगती हैं, तब भौतिक से परे सूक्ष्म ऊर्जा, प्राण, और तत्व भी दिखाई देने लगते हैं। ये कोई भ्रम नहीं है, बल्कि चेतना की गहराई में प्रवेश का संकेत है।

यदि यह अनुभव सहज है और भय नहीं देता, तो यह साधना की प्रगति का संकेत हो सकता है। इसे बस साक्षी भाव से देखिए।

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