guru jee kuch dino pahle tk third eye me Blue colour ki screen dikhai deti thi pr ab kabhi kabhi green.........

Guru jee kuch dino pahle tk third eye me Blue colour ki screen dikhai deti thi pr ab kabhi kabhi green colour second time ke liye aata hai fir kuch nhi dikh rha पहले तीसरी आंख में नीले रंग की स्क्रीन दिखना शांति, गहराई और आध्यात्मिक सुरक्षा का संकेत था। अब बीच-बीच में हरे रंग का आना दर्शाता है कि आपकी साधना की ऊर्जा हीलिंग, संतुलन और हृदय चक्र से जुड़ाव की ओर बढ़ रही है। यह रंग परिवर्तन सामान्य है और साधना के विभिन्न चरणों में होता है। कुछ समय तक रंग न दिखना भी संकेत है कि चेतना आंतरिक स्थिरता ले रही है और मन को विश्राम चाहिए। इसे रुकावट न समझें, बल्कि अभ्यास जारी रखें। धैर्य और नामजप से आगे और गहरे अनुभव होंगे।

Mere ander aag lagi hui h permatma ko jaaneee ki...tadaff rha hu apne malik k bina.... ?

 Mere ander aag lagi hui h permatma ko jaaneee ki...tadaff rha hu apne malik k bina....per mjhe samj ni aa rha h ...kaha se kaise shuru kru...qki chalte firte kaam krte hue mera dhyaan to permatma ki trff rehta he h ...usse aage ni ja pa rha hu.... kripya margdarshan kre .?


आपके भीतर जो परमात्मा को जानने की आग लगी है, वही सच्ची साधना की शुरुआत है। यह तड़प ही सबसे बड़ा वरदान है, क्योंकि बिना तड़प के खोज नहीं होती। आप जहाँ हैं, वहीं से शुरुआत करें—शरीर, मन और प्राण को संतुलित करके।

मार्गदर्शन:

  1. नियमितता: रोज एक निश्चित समय पर शांत बैठें—चाहे 15 मिनट ही क्यों न हों।

  2. जप: अपने इष्ट का नाम जपें, जैसे "ॐ नमः शिवाय", "राम", या "ॐ"

  3. प्राणायाम: धीरे-धीरे अनुलोम-विलोम से प्राण को स्थिर करें।

  4. साक्षी भाव: विचार आएं तो बस देखें, उनसे न लड़ें।

  5. सेवा: दूसरों की सेवा करें, यह हृदय को शुद्ध करता है।

चलते-फिरते भी ध्यान का भाव अच्छा है, लेकिन स्थिर बैठकर आत्मा से मिलना जरूरी है। यही भीतर का मंदिर है।

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