Naad ko drasta bhav se sune ya sadharan tarike se

 नाद को द्रष्टा भाव से सुनना ही बेहतर माना जाता है। इसका अर्थ है कि आप नाद को सुनने की कोशिश या उसमें हस्तक्षेप न करें, बल्कि शांत होकर केवल साक्षी बनकर उसे सुनें। ध्यान को नाद पर टिकाएँ, लेकिन यह अपेक्षा न रखें कि कोई विशेष ध्वनि अवश्य सुनाई दे। नाद तेज हो, धीमा हो, बदलता रहे या कुछ समय के लिए बंद हो जाए—हर स्थिति में केवल साक्षी बने रहें। उसे पकड़ने, बढ़ाने या उसका अर्थ निकालने की कोशिश न करें। धीरे-धीरे मन की चंचलता कम होने पर सूक्ष्म ध्वनि अधिक स्पष्ट अनुभव हो सकती है। यही द्रष्टा भाव की साधना है।

Meri jab dopahar k waqt aankh lgti hai or 10 min k nap k bad main uthti hun tab mujhe shareer me twz kampan mehsoos hota hai. Ye thik hai?

 Meri jab dopahar k waqt aankh lgti hai or 10 min k nap k bad main uthti hun tab mujhe shareer me twz kampan mehsoos hota hai. Ye thik hai?


जी हाँ, यह अनुभव सामान्य हो सकता है, खासकर जब आप गहरी निद्रा की पहली अवस्था से अचानक जागती हैं। शरीर और मस्तिष्क के बीच संतुलन पूरी तरह नहीं बैठा होता, जिससे कंपन जैसा अनुभव हो सकता है। यह हल्का ऊर्जा संचार भी हो सकता है, खासकर यदि आप ध्यान या जप करती हैं। यदि यह कंपन थोड़े समय में स्वतः ठीक हो जाता है और कोई दर्द या कमजोरी नहीं होती, तो चिंता की बात नहीं है। लेकिन यदि यह बार-बार होता है या असहजता बढ़ती है, तो किसी चिकित्सक या अनुभवी साधक से सलाह लेना उचित रहेगा।

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