Naad ko drasta bhav se sune ya sadharan tarike se

 नाद को द्रष्टा भाव से सुनना ही बेहतर माना जाता है। इसका अर्थ है कि आप नाद को सुनने की कोशिश या उसमें हस्तक्षेप न करें, बल्कि शांत होकर केवल साक्षी बनकर उसे सुनें। ध्यान को नाद पर टिकाएँ, लेकिन यह अपेक्षा न रखें कि कोई विशेष ध्वनि अवश्य सुनाई दे। नाद तेज हो, धीमा हो, बदलता रहे या कुछ समय के लिए बंद हो जाए—हर स्थिति में केवल साक्षी बने रहें। उसे पकड़ने, बढ़ाने या उसका अर्थ निकालने की कोशिश न करें। धीरे-धीरे मन की चंचलता कम होने पर सूक्ष्म ध्वनि अधिक स्पष्ट अनुभव हो सकती है। यही द्रष्टा भाव की साधना है।

mujhe kuch dino se sir me dard ho raha 2 month se dhayen and Pranayam karti hu aur ab to jab dhanyan me bethte to dar lagta hai ais ?

 mujhe kuch dino se sir me dard ho raha 2 month se dhayen and Pranayam karti hu aur ab to jab dhanyan me bethte to dar lagta hai aise lagta h jaise koi mere aas pas hai aur fir Aankhe khul jati h jab bhi gahri dheyan .me jate to bahot ajib ajib sa dikhte jaise me kisi ko pani pila rahi ya koi leta h bimar h aur kabhi kabhi lagta mere pas koi h aata h jata h piche ya aage khada h jab bhi dheyan me hoti hu?



आपके अनुभव — सिरदर्द, डर, गहरे ध्यान में अजीब दृश्य देखना, और आसपास किसी के होने का अहसास — यह संकेत कर सकते हैं कि आपकी साधना ने सूक्ष्म स्तर पर प्रवेश करना शुरू कर दिया है। लेकिन यह भी संभव है कि प्राणायाम या ध्यान की विधि संतुलित न हो, जिससे मनोवैज्ञानिक और ऊर्जात्मक असंतुलन हो रहा है।

सिरदर्द व डर का होना दर्शाता है कि अभी आपकी ऊर्जा ऊपर (आज्ञा या सहस्रार) तक उठ रही है, पर स्थिर नहीं है। किसी गुरु या अनुभवी मार्गदर्शक से संपर्क करें। फिलहाल, अधिक गहरे ध्यान से कुछ समय दूरी बनाएं और ग्राउंडिंग (मूलाधार पर ध्यान) करें।

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