Naad ko drasta bhav se sune ya sadharan tarike se

 नाद को द्रष्टा भाव से सुनना ही बेहतर माना जाता है। इसका अर्थ है कि आप नाद को सुनने की कोशिश या उसमें हस्तक्षेप न करें, बल्कि शांत होकर केवल साक्षी बनकर उसे सुनें। ध्यान को नाद पर टिकाएँ, लेकिन यह अपेक्षा न रखें कि कोई विशेष ध्वनि अवश्य सुनाई दे। नाद तेज हो, धीमा हो, बदलता रहे या कुछ समय के लिए बंद हो जाए—हर स्थिति में केवल साक्षी बने रहें। उसे पकड़ने, बढ़ाने या उसका अर्थ निकालने की कोशिश न करें। धीरे-धीरे मन की चंचलता कम होने पर सूक्ष्म ध्वनि अधिक स्पष्ट अनुभव हो सकती है। यही द्रष्टा भाव की साधना है।

dhyan mein Dhood ublane ki smell aaye to kya samjhe

 dhyan mein Dhood ublane ki smell aaye to kya samjhe?


ध्यान में दूध उबलने की गंध आना एक महत्वपूर्ण संकेत हो सकता है। यह ऊर्जा परिवर्तन (energy transformation) या सूक्ष्म जगत के संकेत हो सकते हैं। कभी-कभी साधना के दौरान हमारी सूक्ष्म इंद्रियां जाग्रत होने लगती हैं, जिससे हमें ऐसी गंधें अनुभव होती हैं जो सामान्य रूप से मौजूद नहीं होतीं।

संभावनाएँ:

  1. शुद्धिकरण प्रक्रिया – ध्यान के दौरान अंदरूनी शुद्धि हो रही है।
  2. पूर्व जन्म या आध्यात्मिक संकेत – कोई गहरी याद या संदेश प्रकट हो सकता है।
  3. कुंडलिनी जागरण – ऊर्जा उर्ध्वगमन कर रही है।

इसे सहज रूप से स्वीकार करें और साधना जारी रखें।

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