Naad ko drasta bhav se sune ya sadharan tarike se

 नाद को द्रष्टा भाव से सुनना ही बेहतर माना जाता है। इसका अर्थ है कि आप नाद को सुनने की कोशिश या उसमें हस्तक्षेप न करें, बल्कि शांत होकर केवल साक्षी बनकर उसे सुनें। ध्यान को नाद पर टिकाएँ, लेकिन यह अपेक्षा न रखें कि कोई विशेष ध्वनि अवश्य सुनाई दे। नाद तेज हो, धीमा हो, बदलता रहे या कुछ समय के लिए बंद हो जाए—हर स्थिति में केवल साक्षी बने रहें। उसे पकड़ने, बढ़ाने या उसका अर्थ निकालने की कोशिश न करें। धीरे-धीरे मन की चंचलता कम होने पर सूक्ष्म ध्वनि अधिक स्पष्ट अनुभव हो सकती है। यही द्रष्टा भाव की साधना है।

hvas pe dhyan karti hu mujhe sardi sukhi khasi ho jati hai jaldi thik nai hoti hu kya karu pls guide me

 hvas pe dhyan karti hu mujhe sardi sukhi khasi ho jati hai jaldi thik nai hoti hu kya karu pls guide me?


अगर श्वास पर ध्यान करते समय आपको सर्दी, सूखी खांसी या अन्य शारीरिक समस्याएं हो रही हैं, तो यह आपके शरीर में ऊर्जा के प्रवाह के कारण हो सकता है या आपकी श्वसन प्रणाली में कुछ असंतुलन हो सकता है।

आपके लिए कुछ सुझाव:

  1. गर्म पानी पीएं: इससे आपकी गले की सूजन और खांसी में राहत मिलेगी।
  2. गर्म श्वास प्राणायाम करें: जैसे कपालभाती या अनुलोम-विलोम, जिससे श्वसन प्रणाली संतुलित हो।
  3. संतुलित आहार लें: शहद, अदरक और हल्दी से बना पानी पिएं।
  4. ध्यान में हल्के रहें: श्वास पर ध्यान करते वक्त धीरे-धीरे और गहरे श्वास लें, ताकि शरीर पर ज्यादा दबाव न पड़े।

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