Naad ko drasta bhav se sune ya sadharan tarike se

 नाद को द्रष्टा भाव से सुनना ही बेहतर माना जाता है। इसका अर्थ है कि आप नाद को सुनने की कोशिश या उसमें हस्तक्षेप न करें, बल्कि शांत होकर केवल साक्षी बनकर उसे सुनें। ध्यान को नाद पर टिकाएँ, लेकिन यह अपेक्षा न रखें कि कोई विशेष ध्वनि अवश्य सुनाई दे। नाद तेज हो, धीमा हो, बदलता रहे या कुछ समय के लिए बंद हो जाए—हर स्थिति में केवल साक्षी बने रहें। उसे पकड़ने, बढ़ाने या उसका अर्थ निकालने की कोशिश न करें। धीरे-धीरे मन की चंचलता कम होने पर सूक्ष्म ध्वनि अधिक स्पष्ट अनुभव हो सकती है। यही द्रष्टा भाव की साधना है।

Sir me ek din meditation kar raha tha too mujhe asa lag raha tha ki ghost mere asss pass hoo jasi ghost ki yaad aya rahi thi aur mera time bhi 3 baje ke time ka tha lekin mene jab thodi der baad dhyan lagaya tha na 5 baje ke baad too phir asa kuch nhi laga

  Sir me ek din meditation kar raha tha too mujhe asa lag raha tha ki ghost mere asss pass hoo jasi ghost ki yaad aya rahi thi aur mera time bhi 3 baje ke time ka tha lekin mene jab thodi der baad dhyan lagaya tha na 5 baje ke baad too phir asa kuch nhi laga ?


ध्यान के दौरान भय या भूत जैसी अनुभूति होना मन की गहराई में छिपे डर का परिणाम हो सकता है। प्रातः 3 बजे का समय ब्राह्म मुहूर्त होता है, जब ऊर्जा बहुत संवेदनशील होती है, और अवचेतन मन गहरी स्थितियों को प्रकट कर सकता है।

जब आपने 5 बजे ध्यान किया, तब आपकी मानसिक स्थिति स्थिर थी, इसलिए कोई डर महसूस नहीं हुआ। समाधान:

  1. ध्यान से पहले भगवान का स्मरण करें।
  2. ओम का उच्चारण करें और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाएँ।
  3. संदेह छोड़कर समर्पण करें।
    डर सिर्फ मन का भ्रम है—आत्मा अमर और अजेय है। 🙏

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