Naad ko drasta bhav se sune ya sadharan tarike se

 नाद को द्रष्टा भाव से सुनना ही बेहतर माना जाता है। इसका अर्थ है कि आप नाद को सुनने की कोशिश या उसमें हस्तक्षेप न करें, बल्कि शांत होकर केवल साक्षी बनकर उसे सुनें। ध्यान को नाद पर टिकाएँ, लेकिन यह अपेक्षा न रखें कि कोई विशेष ध्वनि अवश्य सुनाई दे। नाद तेज हो, धीमा हो, बदलता रहे या कुछ समय के लिए बंद हो जाए—हर स्थिति में केवल साक्षी बने रहें। उसे पकड़ने, बढ़ाने या उसका अर्थ निकालने की कोशिश न करें। धीरे-धीरे मन की चंचलता कम होने पर सूक्ष्म ध्वनि अधिक स्पष्ट अनुभव हो सकती है। यही द्रष्टा भाव की साधना है।

मेरे शरीर में सातो चक्र जैसे गोल गोल घूम रहे हैं ऐसा महसे होता है

 मेरे शरीर में सातो चक्र जैसे गोल गोल घूम रहे हैं ऐसा महसे होता है ?


आपके शरीर में सातों चक्रों का गोल-गोल घूमना महसूस होना संकेत है कि आपकी ऊर्जा प्रणाली सक्रिय हो रही है और चक्रों में प्रवाह बढ़ रहा है। यह एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक अनुभव है, लेकिन इसे संतुलित रखना आवश्यक है।

गाइडेंस:

  1. मूलाधार चक्र को संतुलित करें – "लं" मंत्र का जप करें और ग्राउंडिंग अभ्यास करें।
  2. धीमी, गहरी सांसें लें – ऊर्जा को संतुलित करने के लिए प्राणायाम करें।
  3. ध्यान में सहज रहें – किसी भी असहजता पर ज्यादा ध्यान न दें, केवल साक्षी बनें।
  4. नियमितता बनाए रखें – संतुलित साधना करें, जल्दबाजी न करें।

यह एक शुभ संकेत है, इसे सहजता से स्वीकार करें। 🙏

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