Naad ko drasta bhav se sune ya sadharan tarike se

 नाद को द्रष्टा भाव से सुनना ही बेहतर माना जाता है। इसका अर्थ है कि आप नाद को सुनने की कोशिश या उसमें हस्तक्षेप न करें, बल्कि शांत होकर केवल साक्षी बनकर उसे सुनें। ध्यान को नाद पर टिकाएँ, लेकिन यह अपेक्षा न रखें कि कोई विशेष ध्वनि अवश्य सुनाई दे। नाद तेज हो, धीमा हो, बदलता रहे या कुछ समय के लिए बंद हो जाए—हर स्थिति में केवल साक्षी बने रहें। उसे पकड़ने, बढ़ाने या उसका अर्थ निकालने की कोशिश न करें। धीरे-धीरे मन की चंचलता कम होने पर सूक्ष्म ध्वनि अधिक स्पष्ट अनुभव हो सकती है। यही द्रष्टा भाव की साधना है।

Mai harroj Om Namah Shivay ki mala jaap karti hoon aur 11 Hanuman chalisa .. Aur Ram naam ka mansik jaap karti hoon To kya sahi hai?? Ki mujhe Shivji ka hi naamjaap karna chahiye??

 Mai harroj Om Namah Shivay ki mala jaap karti hoon aur 11 Hanuman chalisa .. Aur Ram naam ka mansik jaap karti hoon To kya sahi hai?? Ki mujhe Shivji ka hi naamjaap karna chahiye?? Shivji k konsa naamjaap kru ? Ya om namah shivay ka mansik jaap karu ..?ki Ram naam.hi karu?


आप जो जप कर रही हैं, वह बिल्कुल सही है क्योंकि शिव और राम दोनों एक ही परम तत्व के रूप हैं। शिवजी और रामजी का नामजप करने से मन और आत्मा को शांति मिलती है। अगर आप किसी एक नाम पर केंद्रित होना चाहती हैं, तो अपनी आत्मा की पुकार सुनें। अगर शिवजी की ओर आकर्षण अधिक है, तो "ॐ नमः शिवाय" का मानसिक जप करें। शिवजी के अन्य प्रभावशाली मंत्र जैसे "महामृत्युंजय मंत्र" या "ॐ नमः शम्भवाय च मायोभवाय च नमः शंकराय च मयस्कराय च नमः शिवाय च शिवतराय च" का भी जप कर सकती हैं। 🙏

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