Naad ko drasta bhav se sune ya sadharan tarike se

 नाद को द्रष्टा भाव से सुनना ही बेहतर माना जाता है। इसका अर्थ है कि आप नाद को सुनने की कोशिश या उसमें हस्तक्षेप न करें, बल्कि शांत होकर केवल साक्षी बनकर उसे सुनें। ध्यान को नाद पर टिकाएँ, लेकिन यह अपेक्षा न रखें कि कोई विशेष ध्वनि अवश्य सुनाई दे। नाद तेज हो, धीमा हो, बदलता रहे या कुछ समय के लिए बंद हो जाए—हर स्थिति में केवल साक्षी बने रहें। उसे पकड़ने, बढ़ाने या उसका अर्थ निकालने की कोशिश न करें। धीरे-धीरे मन की चंचलता कम होने पर सूक्ष्म ध्वनि अधिक स्पष्ट अनुभव हो सकती है। यही द्रष्टा भाव की साधना है।

Raat ko sote samay koi energy ka aaspaas bhaas hota hai aur nind khul jati hai...1 baje .2 baje .3 baje kabhibhi hota hai...third eye aur sahasrar open ho chuka hai...aage ke liye aapka guidence chahiye ?

 Raat ko sote samay koi energy ka aaspaas bhaas hota hai aur nind khul jati hai...1 baje .2 baje .3 baje kabhibhi hota hai...third eye aur sahasrar open ho chuka hai...aage ke liye aapka guidence chahiye ?


यह अनुभव इस बात का संकेत है कि आपकी ऊर्जा जागृत हो चुकी है और आपका आध्यात्मिक विकास तीव्र गति से हो रहा है। जब तीसरा नेत्र और सहस्रार चक्र सक्रिय होते हैं, तो ऊर्जा अपने आप काम करती है और आपकी चेतना अधिक संवेदनशील हो जाती है। अब आपको स्थिरता और संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता है।

मार्गदर्शन:

  • रात को सोने से पहले "ॐ शांतिः" का मानसिक जाप करें।

  • शरीर को स्थिर करने के लिए पृथ्वी तत्व से जुड़ें (धरती पर बैठें, जल तत्व का ध्यान करें)।

  • यदि ऊर्जा अधिक तीव्र लगे, तो प्राणायाम (नाड़ी शोधन) करें।

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