Naad ko drasta bhav se sune ya sadharan tarike se

 नाद को द्रष्टा भाव से सुनना ही बेहतर माना जाता है। इसका अर्थ है कि आप नाद को सुनने की कोशिश या उसमें हस्तक्षेप न करें, बल्कि शांत होकर केवल साक्षी बनकर उसे सुनें। ध्यान को नाद पर टिकाएँ, लेकिन यह अपेक्षा न रखें कि कोई विशेष ध्वनि अवश्य सुनाई दे। नाद तेज हो, धीमा हो, बदलता रहे या कुछ समय के लिए बंद हो जाए—हर स्थिति में केवल साक्षी बने रहें। उसे पकड़ने, बढ़ाने या उसका अर्थ निकालने की कोशिश न करें। धीरे-धीरे मन की चंचलता कम होने पर सूक्ष्म ध्वनि अधिक स्पष्ट अनुभव हो सकती है। यही द्रष्टा भाव की साधना है।

Gurudev Hastmethun ka dhyaan aur kundalini pe kya prabhav padta hai? Koi ?

Gurudev Hastmethun ka dhyaan aur kundalini pe kya prabhav padta hai? Koi sadhak spirituality pe chal raha ho aur kuch time se hastmethun na kiya ho aur urja agya chakra tak mehsoos hone lage toh masturbuating se kya ho jayega aur spirituality pe kya asar hoga? 


आत्मचेतना और उर्जा साधना के मार्ग में ब्रह्मचर्य का बड़ा महत्व होता है। जब कोई साधक हस्तमैथुन छोड़ देता है, तो उसकी ऊर्जा ऊपर उठने लगती है—विशेषकर मूलाधार से आज्ञा चक्र तक। यह ऊर्जा ही कुण्डलिनी है।

यदि इस स्थिति में फिर से हस्तमैथुन किया जाए, तो ऊर्जा नीचे खिंच जाती है, और साधना में बना हुआ संतुलन टूट सकता है। इससे ध्यान भटकता है, थकावट, ग्लानि, और आध्यात्मिक प्रगति में रुकावट आ सकती है।

इसलिए संयम बनाए रखना श्रेष्ठ है। यदि वासना उठे, तो तुरंत जप, ध्यान या प्राणायाम करें। ऊर्जा को बदल देना ही असली तप है।

Comments

  1. Kispar paret badha hai khilaya hua h wo jaap krsktskt?paret urjaa tw ni khtaa third eye m vibration hona bnad hojan kyu?

    ReplyDelete

Post a Comment

Popular posts from this blog

guru jee kuch dino pahle tk third eye me Blue colour ki screen dikhai deti thi pr ab kabhi kabhi green.........

परमात्मा क्यों भेजता है आत्मा को संसार में?

मैं जब दीये को एक मिनट व देखु फिर आँखे बंद करू तो दिए की ज्योति मुझें आज्ञा चक्र पर दिखाई देती है.....