Naad ko drasta bhav se sune ya sadharan tarike se

 नाद को द्रष्टा भाव से सुनना ही बेहतर माना जाता है। इसका अर्थ है कि आप नाद को सुनने की कोशिश या उसमें हस्तक्षेप न करें, बल्कि शांत होकर केवल साक्षी बनकर उसे सुनें। ध्यान को नाद पर टिकाएँ, लेकिन यह अपेक्षा न रखें कि कोई विशेष ध्वनि अवश्य सुनाई दे। नाद तेज हो, धीमा हो, बदलता रहे या कुछ समय के लिए बंद हो जाए—हर स्थिति में केवल साक्षी बने रहें। उसे पकड़ने, बढ़ाने या उसका अर्थ निकालने की कोशिश न करें। धीरे-धीरे मन की चंचलता कम होने पर सूक्ष्म ध्वनि अधिक स्पष्ट अनुभव हो सकती है। यही द्रष्टा भाव की साधना है।

Jb me kuch bhi jayada energy wala khana khata hu to mere left side me sir me dard hota h?

 Jb me kuch bhi jayada energy wala khana khata hu to mere left side me sir me dard hota h?


जब आप अधिक ऊर्जा वाला (तेज, भारी या मसालेदार) खाना खाते हैं और उसके बाद सिर के बाएं हिस्से में दर्द होता है, तो यह संकेत है कि शरीर की पाचन अग्नि और ऊर्जा तंत्र उस भोजन को सही ढंग से संसाधित नहीं कर पा रहे। इससे पिंगला नाड़ी अधिक सक्रिय हो सकती है और सिरदर्द जैसे लक्षण दिख सकते हैं।

उपाय:

  1. ताजे, हल्के और सात्विक भोजन लें।

  2. भोजन के बाद थोड़ी देर वज्रासन में बैठें।

  3. भोजन से पहले 2-3 बार अनुलोम-विलोम करें।

  4. त्रिफला चूर्ण रात को लें।

Comments

Popular posts from this blog

guru jee kuch dino pahle tk third eye me Blue colour ki screen dikhai deti thi pr ab kabhi kabhi green.........

परमात्मा क्यों भेजता है आत्मा को संसार में?

मैं जब दीये को एक मिनट व देखु फिर आँखे बंद करू तो दिए की ज्योति मुझें आज्ञा चक्र पर दिखाई देती है.....