mujhe fragnances atti hai jaise hawan ki....dheyan bhi lgta hai ...agge kya kre.

mujhe fragnances atti hai jaise hawan ki....dheyan bhi lgta hai ...agge kya kre...meri body sometimes raat ko ajib c sikudne lgti hai jaise body main kuch khivh rha ho...ye kya hai n agge kya krain ??  यदि ध्यान के दौरान या उसके बाद आपको हवन जैसी सुगंध का अनुभव होता है और ध्यान भी सहज लगने लगता है, तो आध्यात्मिक परंपराओं में ऐसे अनुभवों को कभी-कभी मन की सूक्ष्म एकाग्रता या साधना के दौरान होने वाले आंतरिक अनुभवों के रूप में देखा जाता है। इसी प्रकार, रात में शरीर का सिकुड़ना या भीतर कुछ खिंचने जैसा महसूस होना भी कुछ साधकों को ध्यान के समय अनुभव हो सकता है। लेकिन केवल इन अनुभवों के आधार पर किसी निश्चित आध्यात्मिक अवस्था का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। आपका लक्ष्य अनुभवों का संग्रह नहीं, बल्कि मन की स्थिरता, नाम सिमरन और ईश्वर के प्रति प्रेम होना चाहिए। यदि ये अनुभूतियाँ बिना दर्द और भय के हैं, तो शांत रहकर नियमित साधना जारी रखें। लेकिन यदि शरीर का सिकुड़ना, दर्द, घबराहट या अन्य असामान्य लक्षण बार-बार हों या बढ़ने लगें, तो किसी योग्य चिकित्सक से भी अवश्य जाँच कराएँ, ताकि किसी शारीरिक...

main tota bolata hun jisse ke Karan mujhe bahut dikkatein Hoti hai iske upar ek ?

 main tota bolata hun jisse ke Karan mujhe bahut dikkatein Hoti hai iske upar ek short video banaaiye ki main isko kaise theek kar sakta hun main meri bhabhi ko kaise Pavitra kar sakta hun ?



आपका प्रश्न दो भागों में बंटा हुआ है — एक तोतलापन (speech issue) को लेकर, और दूसरा भाभी को पवित्र करने जैसा एक अत्यंत संवेदनशील और निजी विषय।

पहले भाग पर उत्तर:

तोतलापन (speech problem) को ठीक करने के लिए:

  • प्रतिदिन “ओम” का उच्चारण गहराई से करें, यह गले के कंपन को संतुलित करता है।

  • “श”, “ष”, “स”, “र” जैसे अक्षरों का बार-बार अभ्यास करें।

  • जलनेति और भ्रामरी प्राणायाम बहुत मददगार हैं।

  • किसी स्पीच थैरेपिस्ट की मदद लें — यह वैज्ञानिक और असरदार तरीका है।

अब दूसरे भाग पर स्पष्ट रूप से कहना जरूरी है —
भाभी आपके परिवार का पवित्र हिस्सा हैं। “उन्हें पवित्र करना” जैसा विचार अनुचित, अनैतिक और अधार्मिक है।
सच्चा साधक हर नारी को माँ, बहन, शक्ति और देवी के रूप में देखता है। कृपया अपने विचारों को आत्मनिरीक्षण और साधना से शुद्ध करें।

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