Naad ko drasta bhav se sune ya sadharan tarike se

 नाद को द्रष्टा भाव से सुनना ही बेहतर माना जाता है। इसका अर्थ है कि आप नाद को सुनने की कोशिश या उसमें हस्तक्षेप न करें, बल्कि शांत होकर केवल साक्षी बनकर उसे सुनें। ध्यान को नाद पर टिकाएँ, लेकिन यह अपेक्षा न रखें कि कोई विशेष ध्वनि अवश्य सुनाई दे। नाद तेज हो, धीमा हो, बदलता रहे या कुछ समय के लिए बंद हो जाए—हर स्थिति में केवल साक्षी बने रहें। उसे पकड़ने, बढ़ाने या उसका अर्थ निकालने की कोशिश न करें। धीरे-धीरे मन की चंचलता कम होने पर सूक्ष्म ध्वनि अधिक स्पष्ट अनुभव हो सकती है। यही द्रष्टा भाव की साधना है।

नींद में ध्यान लग जाता है मेरा या फिर चलते चलते खुद हवा में उड़ रहा हूं आसा भर जाता है वह या काहा से काहा पाहोच जाता है या बहुत ऊपर तक चला जाता है फिर वापस आ जाता है उसका क्या मतलब है

 नींद में ध्यान लग जाता है मेरा या फिर चलते चलते खुद हवा में उड़ रहा हूं आसा भर जाता है वह या काहा से काहा पाहोच जाता है या बहुत ऊपर तक चला जाता है फिर वापस आ जाता है उसका क्या मतलब है?


नींद में ध्यान लगने और उड़ने का अनुभव आत्मा के सूक्ष्म जगत में यात्रा करने का संकेत हो सकता है, जिसे अस्त्रल प्रोजेक्शन या सूक्ष्म शरीर यात्रा कहा जाता है। यह स्थिति तब होती है जब आपका चेतन मन शरीर से परे जाकर ब्रह्मांडीय ऊर्जा से जुड़ता है। उड़ने का अहसास स्वतंत्रता, आत्मिक विकास, या गहरे आध्यात्मिक अनुभव का प्रतीक हो सकता है।

ऊपर जाकर फिर लौटना इस बात का संकेत है कि आप अपनी ऊर्जा और चेतना को संतुलन में ला रहे हैं। यह अनुभव सकारात्मक है, लेकिन ध्यान और ग्राउंडिंग प्रथाओं से इसे और अधिक स्थिर और सुरक्षित बनाया जा सकता है।

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