Naad ko drasta bhav se sune ya sadharan tarike se

 नाद को द्रष्टा भाव से सुनना ही बेहतर माना जाता है। इसका अर्थ है कि आप नाद को सुनने की कोशिश या उसमें हस्तक्षेप न करें, बल्कि शांत होकर केवल साक्षी बनकर उसे सुनें। ध्यान को नाद पर टिकाएँ, लेकिन यह अपेक्षा न रखें कि कोई विशेष ध्वनि अवश्य सुनाई दे। नाद तेज हो, धीमा हो, बदलता रहे या कुछ समय के लिए बंद हो जाए—हर स्थिति में केवल साक्षी बने रहें। उसे पकड़ने, बढ़ाने या उसका अर्थ निकालने की कोशिश न करें। धीरे-धीरे मन की चंचलता कम होने पर सूक्ष्म ध्वनि अधिक स्पष्ट अनुभव हो सकती है। यही द्रष्टा भाव की साधना है।

मुझे दीवार पर हर जगह स्क्रीन दिखती थी, काली और कभी सफेद ट्यूबलाइट दिखती थी, क्या होता था?

 

मुझे दीवार पर हर जगह स्क्रीन दिखती थी, काली और कभी सफेद ट्यूबलाइट दिखती थी, क्या होता था?

ध्यान के दौरान दीवार पर स्क्रीन या रोशनी देखना आपकी आंतरिक जागरूकता और आध्यात्मिक प्रगति का संकेत हो सकता है। काली या सफेद स्क्रीन आपके मन की स्थिति और शुद्धिकरण प्रक्रिया का प्रतीक हो सकती है। सफेद ट्यूबलाइट जैसी रोशनी ऊर्जा और चेतना के ऊंचे स्तर की ओर इशारा करती है।

यह अनुभव आपकी तीसरी आंख (आज्ञा चक्र) के सक्रिय होने का प्रारंभिक संकेत भी हो सकता है। इसे सहजता से स्वीकार करें, ध्यान में स्थिर रहें और अनुभव को गहराई से महसूस करें। किसी गुरु से मार्गदर्शन लेकर ध्यान को संतुलित रूप से जारी रखें।

Comments

Popular posts from this blog

guru jee kuch dino pahle tk third eye me Blue colour ki screen dikhai deti thi pr ab kabhi kabhi green.........

परमात्मा क्यों भेजता है आत्मा को संसार में?

मैं जब दीये को एक मिनट व देखु फिर आँखे बंद करू तो दिए की ज्योति मुझें आज्ञा चक्र पर दिखाई देती है.....