Naad ko drasta bhav se sune ya sadharan tarike se

 नाद को द्रष्टा भाव से सुनना ही बेहतर माना जाता है। इसका अर्थ है कि आप नाद को सुनने की कोशिश या उसमें हस्तक्षेप न करें, बल्कि शांत होकर केवल साक्षी बनकर उसे सुनें। ध्यान को नाद पर टिकाएँ, लेकिन यह अपेक्षा न रखें कि कोई विशेष ध्वनि अवश्य सुनाई दे। नाद तेज हो, धीमा हो, बदलता रहे या कुछ समय के लिए बंद हो जाए—हर स्थिति में केवल साक्षी बने रहें। उसे पकड़ने, बढ़ाने या उसका अर्थ निकालने की कोशिश न करें। धीरे-धीरे मन की चंचलता कम होने पर सूक्ष्म ध्वनि अधिक स्पष्ट अनुभव हो सकती है। यही द्रष्टा भाव की साधना है।

गुरुजी जब मैं ध्यान करता हूं तो मेरी एक आंख में आंसू आता है और उदासी बहुत आती है इसका क्या मतलब है

 गुरुजी जब मैं ध्यान करता हूं तो मेरी एक आंख में आंसू आता है और उदासी बहुत आती है इसका क्या मतलब है?


जब मैं ध्यान करता हूं तो मेरी एक आंख में आंसू आता है और भीतर गहरी उदासी का अनुभव होता है। इसका अर्थ है कि ध्यान प्रक्रिया के दौरान आपके भीतर दबी हुई भावनाएं, पुराने अनुभव या संस्कार जागृत हो रहे हैं। एक आंख से आंसू आना इंगित कर सकता है कि आपका शरीर और मन असंतुलित भावनाओं को मुक्त कर रहे हैं। उदासी का आना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है, जो भावनात्मक शुद्धि का हिस्सा हो सकती है। इसे स्वीकार करें, भावनाओं को बहने दें, और अपने गुरु से मार्गदर्शन लें। धीरे-धीरे यह अनुभव हल्का हो जाएगा।

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