ध्यान करने के लिए मन इतना याकुल क्यों होता है।

 ध्यान करने के लिए मन इतना याकुल क्यों होता है।?


ध्यान करने के लिए मन व्याकुल होना आपकी आत्मा की गहरी प्यास और आंतरिक शांति की खोज का संकेत है। यह व्याकुलता दर्शाती है कि मन बाहरी चीजों से थक चुका है और भीतर की ओर मुड़ना चाहता है। ध्यान आत्मा से जुड़ने और सच्ची शांति का अनुभव करने का साधन है। जब मन अशांत या अस्थिर होता है, तो ध्यान की लालसा बढ़ती है। इसे संतुलित रखने के लिए, ध्यान से पहले गहरी सांस लें और मन को धीरे-धीरे शांत करें। नियमित अभ्यास और संयम से यह व्याकुलता आत्म-समर्पण और गहरे ध्यान में परिवर्तित हो सकती है।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

guru jee kuch dino pahle tk third eye me Blue colour ki screen dikhai deti thi pr ab kabhi kabhi green.........

परमात्मा क्यों भेजता है आत्मा को संसार में?

मैं जब दीये को एक मिनट व देखु फिर आँखे बंद करू तो दिए की ज्योति मुझें आज्ञा चक्र पर दिखाई देती है.....