Naad ko drasta bhav se sune ya sadharan tarike se

 नाद को द्रष्टा भाव से सुनना ही बेहतर माना जाता है। इसका अर्थ है कि आप नाद को सुनने की कोशिश या उसमें हस्तक्षेप न करें, बल्कि शांत होकर केवल साक्षी बनकर उसे सुनें। ध्यान को नाद पर टिकाएँ, लेकिन यह अपेक्षा न रखें कि कोई विशेष ध्वनि अवश्य सुनाई दे। नाद तेज हो, धीमा हो, बदलता रहे या कुछ समय के लिए बंद हो जाए—हर स्थिति में केवल साक्षी बने रहें। उसे पकड़ने, बढ़ाने या उसका अर्थ निकालने की कोशिश न करें। धीरे-धीरे मन की चंचलता कम होने पर सूक्ष्म ध्वनि अधिक स्पष्ट अनुभव हो सकती है। यही द्रष्टा भाव की साधना है।

अगर हमें गुरु से सिर्फ नमः शिवाय मंत्र प्राप्त हुआ है तो क्या हम ओम नमः शिवाय मंत्र का जाप कर सकते हैं

 अगर हमें गुरु से सिर्फ नमः शिवाय मंत्र प्राप्त हुआ है तो क्या हम ओम नमः शिवाय मंत्र का जाप कर सकते हैं ?


हाँ, यदि आपके गुरु ने आपको केवल "नमः शिवाय" मंत्र दिया है, तो आदर्श रूप से आपको उसी का जप करना चाहिए, क्योंकि यह आपके लिए विशेष रूप से दिया गया है। लेकिन यदि आपका मन "ॐ नमः शिवाय" मंत्र की ओर भी आकर्षित हो रहा है, तो आप पहले अपने भीतर इसकी स्वीकृति महसूस करें। "ॐ" बीज मंत्र है, जो ऊर्जा को और अधिक सक्रिय कर सकता है। यदि आप इसे जोड़ना चाहते हैं, तो धीरे-धीरे करें और अनुभवों को महसूस करें। यदि कोई संदेह हो, तो अपने गुरु से ही मार्गदर्शन लें। श्रद्धा और विश्वास ही मुख्य हैं। 🙏

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  1. माँ दुर्गा का पुजा करते समय शरीर में कंपन जैसा कयों होता है

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