Naad ko drasta bhav se sune ya sadharan tarike se

 नाद को द्रष्टा भाव से सुनना ही बेहतर माना जाता है। इसका अर्थ है कि आप नाद को सुनने की कोशिश या उसमें हस्तक्षेप न करें, बल्कि शांत होकर केवल साक्षी बनकर उसे सुनें। ध्यान को नाद पर टिकाएँ, लेकिन यह अपेक्षा न रखें कि कोई विशेष ध्वनि अवश्य सुनाई दे। नाद तेज हो, धीमा हो, बदलता रहे या कुछ समय के लिए बंद हो जाए—हर स्थिति में केवल साक्षी बने रहें। उसे पकड़ने, बढ़ाने या उसका अर्थ निकालने की कोशिश न करें। धीरे-धीरे मन की चंचलता कम होने पर सूक्ष्म ध्वनि अधिक स्पष्ट अनुभव हो सकती है। यही द्रष्टा भाव की साधना है।

kya kalyung me shib ka jaap karke mokchh milega

 kya kalyung me shib ka jaap karke mokchh milega ?


हाँ, कलियुग में "शिव" का जप करके मोक्ष प्राप्त किया जा सकता है। यह युग नाम-स्मरण और भक्ति का युग है, जिसमें भगवान शिव का नाम लेने मात्र से भी पाप कटते हैं और आत्मा शुद्ध होती है। "ॐ नमः शिवाय" या "महामृत्युंजय मंत्र" का नित्य जप करने से चित्त शांत होता है, कर्मों का बंधन कटता है और शिव कृपा प्राप्त होती है। लेकिन केवल जप ही नहीं, सद्गुण, अहंकार त्याग, सेवा, और आत्मज्ञान भी जरूरी हैं। सच्ची श्रद्धा और समर्पण से शिव अवश्य मोक्ष प्रदान करेंगेशिव ही सत्य हैं, शिव ही मुक्ति हैं। 🚩🙏

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