Naad ko drasta bhav se sune ya sadharan tarike se

 नाद को द्रष्टा भाव से सुनना ही बेहतर माना जाता है। इसका अर्थ है कि आप नाद को सुनने की कोशिश या उसमें हस्तक्षेप न करें, बल्कि शांत होकर केवल साक्षी बनकर उसे सुनें। ध्यान को नाद पर टिकाएँ, लेकिन यह अपेक्षा न रखें कि कोई विशेष ध्वनि अवश्य सुनाई दे। नाद तेज हो, धीमा हो, बदलता रहे या कुछ समय के लिए बंद हो जाए—हर स्थिति में केवल साक्षी बने रहें। उसे पकड़ने, बढ़ाने या उसका अर्थ निकालने की कोशिश न करें। धीरे-धीरे मन की चंचलता कम होने पर सूक्ष्म ध्वनि अधिक स्पष्ट अनुभव हो सकती है। यही द्रष्टा भाव की साधना है।

Mere ghutno me dard rahta h sir

 Mere ghutno me dard rahta h sir ?


घुटनों में दर्द का कारण शरीर में ऊर्जा असंतुलन, गलत मुद्रा, कैल्शियम या विटामिन D की कमी, या पुराने संस्कार (कर्मिक ऊर्जा) भी हो सकते हैं। ध्यान और जप करने से ऊर्जा शरीर में तीव्र गति से प्रवाहित होती है, जिससे कभी-कभी पुराने दर्द जागृत हो सकते हैं।

उपाय:

  1. सूर्य स्नान करें – विटामिन D के लिए।
  2. हल्का योग करें – विशेषकर पवनमुक्तासन और वज्रासन।
  3. गर्म तेल की मालिश करें – सरसों या तिल के तेल से।
  4. हल्दी और अश्वगंधा का सेवन करें
  5. ध्यान में पृथ्वी तत्व पर ध्यान दें – इससे स्थिरता आएगी।

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