Naad ko drasta bhav se sune ya sadharan tarike se

 नाद को द्रष्टा भाव से सुनना ही बेहतर माना जाता है। इसका अर्थ है कि आप नाद को सुनने की कोशिश या उसमें हस्तक्षेप न करें, बल्कि शांत होकर केवल साक्षी बनकर उसे सुनें। ध्यान को नाद पर टिकाएँ, लेकिन यह अपेक्षा न रखें कि कोई विशेष ध्वनि अवश्य सुनाई दे। नाद तेज हो, धीमा हो, बदलता रहे या कुछ समय के लिए बंद हो जाए—हर स्थिति में केवल साक्षी बने रहें। उसे पकड़ने, बढ़ाने या उसका अर्थ निकालने की कोशिश न करें। धीरे-धीरे मन की चंचलता कम होने पर सूक्ष्म ध्वनि अधिक स्पष्ट अनुभव हो सकती है। यही द्रष्टा भाव की साधना है।

महाराज जी प्रेमानंद जी महाराज जी ने बोला था नाम किसी के सिर पर लिख सकते है वो कैसे कर सकते है प्लिज़ वीडियो बनाओ कोनसी विधि से नाम लिख सकते और ध्यान कर सकते है बहुत दिनों से यह सवाल कृपा आप मदद करे सब को आप मार्गदर्शन करिये

 महाराज जी प्रेमानंद जी महाराज जी ने बोला था नाम किसी के सिर पर लिख सकते है वो कैसे कर सकते है प्लिज़ वीडियो बनाओ कोनसी विधि से नाम लिख सकते और ध्यान कर सकते है बहुत दिनों से यह सवाल कृपा आप मदद करे सब को आप मार्गदर्शन करिये?


महाराज जी प्रेमानंद जी द्वारा बताए गए इस रहस्य को समझने के लिए नाम को सिर पर लिखने की विधि गुप्त और गहरी ध्यान साधना से जुड़ी है। यह एक प्रकार की मानसिक शक्ति और ध्यान विधि है, जिसमें साधक अपने चित्त में किसी के सिर पर मंत्र या ईष्ट का नाम लिखने की भावना करता है।

संभावित विधि:

  1. शांत चित्त से बैठें और ध्यान अवस्था में जाएँ।

  2. मन की आँखों से उस व्यक्ति के सिर की कल्पना करें।

  3. अपने ध्यान से उनके सिर पर मंत्र या नाम लिखें।

  4. श्रद्धा और विश्वास रखें कि यह नाम उनके चित्त में स्थापित हो रहा है।

Comments

Popular posts from this blog

guru jee kuch dino pahle tk third eye me Blue colour ki screen dikhai deti thi pr ab kabhi kabhi green.........

परमात्मा क्यों भेजता है आत्मा को संसार में?

मैं जब दीये को एक मिनट व देखु फिर आँखे बंद करू तो दिए की ज्योति मुझें आज्ञा चक्र पर दिखाई देती है.....